Tuesday, October 27, 2009

झटका...!!!

डाक्टर ने मरीज़ को मेज पर लिटाया
बिना वस्त्र हटाए ही इन्जैक्शन लगाया।
जब मरीज़ ने सुई न चुभने
दर्द न होने की शिकायत की
तो डॉक्टर ने ज़ोर का कहकहा लगाया बोला,
‘‘हमारे टीके से दर्द का होना
हमारी सुई से मरीज़ का रोना
इतना आसान नहीं है,
ये डाक्टर झटका का क्लीनिक है,
किसी नौसिखिए की दुकान नहीं है।’’

आश्वस्त होकर मरीज़ ने
पैसे देने के लिए जैसे ही पर्स खोला
उसके चेहरे पर मुर्दनी छा गई
इन्जैक्शन नोटों में घुस गया,
और दवा पर्स में आ गई।

इसी प्रकार सरकारी अनुदान की
राशि अपना अलग चमत्कार दिखलाती है।
जिसे ग़रीब की धमनियों में पहुंचना चाहिए
वो इन्जैक्शन की दवाई की तरह
दलालों के पर्स में पहुंच जाती है।

2 comments:

IMAGE PHOTOGRAPHY said...

खुबसुरत रचना...

निर्मला कपिला said...

वाह बहुत सुन्दर व्यंग है धन्यवाद्