उजले मोती हमने मांगे थे किसी से थाल भर,
और उसने दे दिए आंसू हमें रुमाल भर’!
अँधियारा जिससे शरमाए उजियारा जिसको ललचाए,
ऐसा दे दो दर्द मुझे तुम मेरा गीत दिया बन जाए।
मैंने तो चाहा बहुत कि अपने घर में रहूँ अकेला पर,
सुख ने दरवाजा बन्द किया, दुख ने दरवाजा खोल दिया।
ऐसी घनी उदासियाँ बहते जिगर के छाले,
किस जुर्म की सजा में दिल दर्द के हवाले।
अभी अभी उसने बतलाया दर्द कई हैं भारी-भारी,
रोटी और पेट का रिश्ता दिल का और नजर का रिश्ता।
सहते सहते गम से यारी हो गयी,
सारी दुनिया ही हमारी हो गई।
तेरे मैखाने सरेआम से खाली खाली,
सुरूर और ही उस कुदरती शराब का है।
दिल दर्द सुना करता दिल दर्द कहा करता,
अहसास का समुन्दर चुपचाप बहा करता।
करिश्मा है सबसे अच्छा आदमी का खिलखिलाना,
यह बहाना वह बहाना मौत का भी क्या ठिकाना।
रुक गई थी थोड़ा सुस्ताने अभी,
फिर चलेगी दर्द की बारात। ........
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