Thursday, September 17, 2009

हंसने वालो से डरते है, छुप छुप कर रो लेते है,
गहरी गहरी सोच मै डुबे दो दिवाने याद आए !

ठंडी सर्द हवा के झोंके, आग लगा कर छोड़ गए,
फूल खिले शाखों पे नये, और दर्द पुराने याद आए !

1 comment:

निर्मला कपिला said...

दोनो शे र लाजवाब हैं शुभकामनायें