फर्जी सेना नकली सैनिक और लड़ाई जारी है,
चोरी और ऊपर से सीनाजोरी की चढाई जारी है।
देखो-देखो कितनी मोहक नीति बनाई राजा ने,
भोगविलास और अय्याशी की अगुआई जारी है।
विद्वानों की सभा सजी है मोटे ग्रंथ विचारों के,
सच का कुछ अनुमान नहीं है कलम घिसाई जारी है।
मानवहित पर बहस चल रही संसद पखवाड़े से,
और सदन में मारामारी-हाथापाई जारी है।
मंत्र नहीं जाने बिच्छू का हाँथ साँप के बिल में दे,
जहर उगलती राजनीति की क्या कुटिलाई जारी है।
लड्डू खाकर जनता खुश है राजा खुश है सत्ता से,
घूँस दलाली वाली रबड़ी और मलाई जारी है।
फैसला लिखने वाले डाकू की निगरानी में,
मौत किसी की भी लिखवा लो सुलह सफाई जारी है।
गधा पंजीरी खाए जमकर बैलों के दरबार सजे,
भूखी तड़फे गाय बेचारी घास चराई जारी है।
कुर्सी नहीं बपौती लेकिन कितनी अच्छी लगती है,
छँटे हुए मक्कारों वाली टाँग खिंचाई जारी है।
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