Thursday, September 17, 2009

दर्द की कतरन-1

दर्द भी कोई किसी का, लय में कभी उठता है क्या ?
मात्राएं गिनकर कोई गीत कभी लिखता है क्या ?

दर्द पहले आया यहां या पहले व्याकरण आई
ज़ख्म जिसने न गिने हों, वो शब्दों को गिनता है क्या ?

जो लिखते हैं सलीके से, उनको भी मिलता है क्या ?
तारीफ और कुछ तालियों से, दुख कभी मिटता है क्या ?

छोड़िये क्या बात करनी कायदे और कानून की
काग़ज़ों के फूल पर भंवरा कोई मिलता है क्या ?

दिल की बात सीधी ही दिल तक पहुंचनी चाहिए
इनाम और ये नाम कभी, जग में कहीं टिकता है क्या ?

गीत-ग़ज़ल के पारखी कुछ कह कर दम लेंगे
प्यासे के दिल से पूछिए, उसे पानी में दिखता है क्या ? ........

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