Saturday, December 22, 2012

चमचा

थाली से छोटा होता है चमचा

डोंगे से छोटा होता है चमचा

कटोरी से छोटा होता है चमचा

पर साहब की थाली मैं पड़ा इतराता

बहुत बड़ा होता है चमचा



साहब को ठेके के चावल खिलाता है चमचा

साहब को कमीशन का हलवा खिलाता है चमचा

तन्वंगी भिंडी का स्वाद चखाता है चमचा

शाही ठाठ से पनीर खिलाता है चमचा



बहुत ही त्यागी होता है चमचा

साहब का भरता है पेट

ख़ुद खाली पेट रहता है चमचा

साहब के मुहं मे आ जाये कंकर अगर

हंसकर झूठन उठता है चमचा



खुशी से फुला नही समाता है चमचा

जब साहब के हाथो मे होता है चमचा

जब साहब के होठों को छूता है चमचा

बौने नजर आते है सब

साहब बन जाता है साहब ...का चमचा



साहब के साहब की पार्टी मे

छोटा बड़ा सब तरह का होता है चमचा!

जगमगाते विदेशी बर्तनों के बीच

टेबल पर चांदी का सजता है चमचा!

छोटे मोटे दोस्तों की पार्टी के बीच

स्टील का चलता है चमचा



मे तो हाथ से खालूंगा साहब बोला चमचा

चमचे को नसीब नही होता चमचा

साहब के कच्चे कानो मे कुछ फुसफुसाता है चमचा

पर निंदा का रस पिलाता है चमचा

सावन का अँधा होगता है साहब

कुछ भी नजर नही आता

नजर आता है साहब को बस साहब का चमचा



घर मे अचानक टपक पड़े साहब अगर

फुला नही समाता है चमचा

सारा घर बन जाता है चमचे का चमचा

मेरे साहब आज मेरे घर आए

टेलीफोन पर ताजा समाचार पढ़कर

चमचों को सुनाता है चमचा



चमचमाती दुनिया मे प्यारे

हर कोई किसी न किसी का चमचा!

कोई अपनी पत्नी का चमचा

कोई दुसरे की बीबी का चमचा

कोई साहब का चमचा तो कोई साहिबा का चमचा!..................

सरकारी व्यवस्था

पलक झपकते ही


हमारी अटेची साफ हो गई

झपकी खुली

तो सामने लिखा था-

इस स्टेशन पर

सफाई का

मुफ्त प्रबंध है!...............





इन्क्वायरी काउंटर पर

किसी को भी न पाकर

हमने प्रबंधक से कहा जाकर-

पूछताछ बाबू सीट पर नही है

उसे कहा ढूंढे?

जबाब मिला-

"पूछताछ काउंटर पर पूछे!..........





होनी थी हो गई

डाक व्यवस्था पर

जो फ़िल्म बनी थी

वह डाक मे ही

कही खो गई!.....................





सरकारी बस थी

सरकती न थी

बस, थी!..........................





रात

बारह बजे के बाद

आई एक

पुलिस वाले की आवाज

किसी ने सुना-जागते रहो

किसी ने सुना-भागते रहो!..............





सरकारी बस की

भीड़ मे

वह ऐसा फंस गया

कि फ़िर न निकला

वाही बस गया! ………………



भागते भुत कि लंगोटी भली

यह भी क्या कहावत है

जब भुत दिखता ही नही

तो उसे लंगोटी पहनने कि

क्या जरुरत है!





शेर शेरनी से नही डरता

क्योंकि

प्यार करता है

शादी नही करता

आदमी ऑरत से डरता है

क्योंकि

प्यार नही सिर्फ़ शादी करता है!





जो खांमखा पाँव छूता है

उससे बचो

क्योंकि

वो आदमी नही जूता है!







किसी के पास एलोपैथी

किसी के पास होम्योपैथी

किसी के पास नेचरोपैथी

बीमार को चाहिए थी सिम्पैथी!



डाक्टर ने

मरीज़ को

टेबुल पर लिटाया

बिना वस्त्र हटाए ही

इन्जैक्शन लगाया।

जब मरीज़ ने

सुई न चुभने

दर्द न होने की

शिकायत की

तो डॉक्टर ने

ज़ोर का कहकहा लगाया

बोला, ‘‘हमारे टीके से

दर्द का होना

हमारी सुई से

मरीज़ का रोना

इतना आसान नहीं है,

ये डाक्टर झटका का

क्लीनिक है,

किसी नौसिखिए की

दुकान नहीं है।’’



आश्वस्त होकर

मरीज़ ने

पैसे देने के लिए

जैसे ही पर्स खोला

उसके चेहरे पर

मुर्दनी छा गई

इन्जैक्शन नोटों में घुस गया, और

दवा पर्स में आ गई।



इसी प्रकार

सरकारी अनुदान की राशि

अपना अलग

चमत्कार दिखलाती है।

जिसे

ग़रीब की धमनियों में पहुंचना चाहिए

वो इन्जैक्शन की

दवाई की तरह

दलालों के पर्स

में पहुंच जाती है।

रावण वध

राम लीला मे रावण वध का सीन था


मगर किसी को क्या मालुम

की मामला कितना संगीन था

हुआ यह

की किसी ने

रावण को ठर्रा पिला दिया

दुसरे ने यह कहकर गुस्सा दिला दिया

की देखो

रामलीला वालो की तुच्चाई

रामचंद्र को पेमेंट एडवांस

और तुम्हारा उधार वो भी चौथाई

सुनते ही

रावण जी अड़ गए

मरने की बजाय

राम के गले पड़ गए

मारते-मारते

रामचन्द्रजी हो गए अधमरे

मगर रावणजी नही मरे

तो धर्म परायण जनता चिल्लाई-

ये क्या नाटक हो रहा है भाई?

सारे तीर ख़त्म हो गए

फ़िर भी नही मर रहा है

कोई बोला-

रावण को जल्दी निपटाओ

अकेले राम से

नही मर रहा है

तो हनुमान को बुलाओ

मंच से आवाज आई-

हनुमान जी नही आ सकते

मलेरिया

बुखार मे पड़े है

रामलीला के सारे बन्दर

अस्पताल मे खड़े है

अब अगले साल ही

काम आयेगे

मगर आप

चिंता मत करो

हम रावण को

इस बार भी

इसी राम से

मरवा के दिखायेगे

सुनते ही रावण ने

इतनी जोर से

ठहाका लगाया

की रामचंद्र जी काँपने लगे

लक्ष्मण जी हाफ़ने लगे

तो

एक राम भक्त चिल्लाया-

रावण को समझाओ

अपनी ऑकात से

बाहर जा रहा है

राजा राम को डरा रहा है!

इस रावण का क्या नाम है?

कोई भीड़ मे से बोला-

बब्बू पहलवान है!

हमने पहले ही कहा था

पहलवान से रावण का रोल

मत करवाओ

रामलीला को

रामलीला रहने दो

अखाडा मत बनाओ

मगर रामलीला वाले तब नही माने

अब मामला अटक गया है

तो वही जाने



एक बुड्ढे बाबा बोले-

समझ मे नही आता

रावण को

क्या हो गया है

ऐसे तो कभी नही करता था

हर साल

बड़े आराम से मरता था

इस बार क्या बात है



कोई बोला-

हो न हो

इसमे जरुर

पाकिस्तान का हाथ है

ये सब

उसकी खुराफात है

एक षड्यंत्र है

जो आगे जाकर

खतरनाक मोड़ ले सकता है

इस बार तो सिर्फ़

रावण धोखा दे रहा है

यही हाल रहा

तो अगले साल

हनुमान भी धोखा दे सकता है



कोई बोला-

नही-नही

पाकिस्तान जैसी कोई बात नही है

इसमे किसी विदेशी

का हाथ वाथ नही है

असल मे मामला

राजनैतिक लड़ाई का है

ये जो राम बना है

भाजपाई है

और रावण कांग्रेस आई का है

भाजपाई राम से कैसे मरे

यह तो तभी सम्भव है

जब राम का रोल भी कोई

कांग्रेसी ही करे

एक दर्शक बोला

हम कुछ नही जानते

रावण को तुरंत मारवाओ!

धीरे-धीरे शौर बढ़ने लगा

माहौल बिगाड़ने लगा

तो लक्ष्मणजी घबराए

भागे-भागे हमारे पास मे आये

बोले-

आनंद जी

रावण को समझाओ

मरने का नाम ही नही ले रहा है

उलटे



हमको

जान से मारने की

धमकी दे रहा है

हमने कहा-

क्यों रे, रावण

क्या बात है

क्यों नही मरता?

रावण बोला-

भाई साहब

पहले उस डायरेक्टर से

बात कर लो

वो हमारा

पिछले साल का

पेमेंट क्यों नही करता

अपने

वादे से मुकर रहा है

हनुमान तक का

पेमेंट कर दिया है

और

हमारा नही कर रहा है

हमने कहा-

यार

क्या घटिया बात करते हो!

रामायण के पत्र हो कर

पैसे पर मरते हो?

वो बोला-

नही तो क्या आप पे मारून?

और घर मे

जो बारह बच्चे घूम रहे है

उनका इंतजाम कहाँ से करूँ?

हमने कहा-

बारह बच्चे!

भाई बहुत अच्छे,

बहुत अच्छे!

क्या राजा होकर

आपको

इतना टाइम मिल जाता है?

क्यों आप को कोई शक है?

वो तो हमारी कृपा समझो

की संख्या

केवल बारह तक है

वरना आनंद जी

आप ही

हिसाब लगा के बताइए

की

जिस रावण के मुंह दस है

उसके

बच्चे कितने होने चाहिए!

हमने कहा-

इस हिस्साब से तो

पुरा हिन्दुस्तान ही

आपका बच्चा है

मगर

इस समय

हिन्दुस्तान के लिए

यही अच्छा है के आप तत्काल मरे

बेचारे राम के लिए

कोई संकट पैदा न करे!



रावण बोला-

नही मरूँगा

और कान खोल कर सुन लो

अगले साल से

रामलीला मे

रोल भी नही करूँगा



हमने कहा-

नही यार,ऐसी क्या नाराजगी है!

वो बोला

आपको नही मालुम साहब

इस नौटंकी का मालिक

कितना पाजी है



हमको दशरथ का रोल

मिल रहा था

मगर इसने

रावण बना कर

मरवा दिया

और हमारा पेमेंट

अकेले मे मंदोदरी को करावा दिया

हमने माँगा तो

अंगूठा दिखा दिया

बोला

मरने के बाद

काहे का पेमेंट!

इसलिए भैया

इस बार तो

हम तभी मरेगे

जब

नोट मिल जायेगे

सेंट परसेंट

आप मे दम हो

तो आप निकालो

वरना चुपचाप जाकर

पंडाल मे

अपनी सीट संभालो!



हमने कहा-

रावण तू ठीक कहता है

हम तो भूल ही गए थे

की तू आजकल

लंका मे नही

हिन्दुस्तान मे रहता है

ये ले पचास का नोट संभाल

और हमारे रामचंद्र जी को

टेंसन से निकाल



पचास का नोट देख कर

रावण मुस्कुराया

हमारे पास आया

और हमारे कानो मे फुसफुसाया

बोला-अब मरने मे बिल्कुल

देर नही लगाऊंगा

राम से कहो तीर-वीर की

कोई जरुरत नही

अब वो आँख भी मार देगा

तो मे बड़े प्यार से मर जाऊंगा!



थानेदार


एक थानेदार ने सुहागरात को डांटते हुए अपनी पत्नी से नाम पत्ता और उम्र पूछी……………

वह उसे डायरी मैं लिखते हुए बोला....क्या तुम यकीन से कह सकती हो की तुम्ही मेरी बीवी हो……………

पत्नी घबराई बोली नाथ ये क्या मजाक है कुछ दिन पहले ही अपनी हुई सगाई थी

और कल ही तो मैंने आपको वरमाला पहनाई थी………..

वरमाला पहनाई थी तो मैं वरमाला का पंचनामा करवाऊंगा

उससे तुम्हारे फिंगर प्रिंट मिलाऊंगा

अब तो पत्नी रोने लगी.. आँसुओ से मुंह को धोने लगी

रोते-रोते बोली हे नाथ मुझको अपनी पत्नी मानो...

इस बेकार के झंझट मैं मत डालो......

थानेदार ने कहा ठीक है फ़िर पचास रूपये निकालो...........

सब्जी वाला

ये सब्जी वाला हमको क्या समझता है - जब भी चाहे ताने कसता है!

आप और खरीदेगे सब्जीयाँ - अपनी शक्ल देखी है मियाँ

करेले एक रूपये के पाँच - चहरा बिगाड़ देगी आलुओं की आँच

पालक पच्चास पैसे के पाँच पत्ती - गोभी दो आने रत्ती

कठहल का भाव सुनोगे तो कलेजा हिल जायेगा

ये नेताओं का चरित्र नही जो चारआन्ने पाव मिल जायेगा..................

चालीसवाँ राष्ट्रीय भ्रष्टाचार महोत्सव

पिछले दिनों

चालीसवाँ राष्ट्रीय भ्रष्टाचार महोत्सव मनाया गया।

सभी सरकारी संस्थानों को बुलाया गया।

भेजी गई सभी को निमंत्रण-पत्रावली

साथ मे प्रतियोगिता की नियमावली।

लिखा था-

प्रिय भ्रष्टोदय,

आप तो जानते हैं

भ्रष्टाचार हमारे देश की

पावन-पवित्र सांस्कृतिक विरासत है

हमारी जीवन-पद्धति है

हमारी मजबूरी है, हमारी आदत है।

आप अपने विभागीय भ्रष्टाचार का

सर्वोत्कृष्ट नमूना दिखाइए

और उपाधियाँ तथा पदक-पुरस्कार पाइए।

व्यक्तिगत उपाधियाँ हैं-

भ्रष्टशिरोमणि, भ्रष्टविभूषण

भ्रष्टभूषण और भ्रष्टरत्न

और यदि सफल हुए आपके विभागीय प्रयत्न

तो कोई भी पदक, जैसे-

स्वर्ण गिद्ध, रजत बगुला

या कांस्य कउआ दिया जाएगा।

सांत्वना पुरस्कार में

प्रमाण-पत्र और

भ्रष्टाचार प्रतीक पेय ह्वस्की का

एक-एक पउवा दिया जाएगा।

प्रविष्टियाँ भरिए

और न्यूनतम योग्यताएँ पूरी करते हों तो

प्रदर्शन अथवा प्रतियोगिता खंड में स्थान चुनिए।

कुछ तुले, कुछ अनतुले भ्रष्टाचारी

कुछ कुख्यात निलंबित अधिकारी

जूरी के सदस्य बनाए गए,

मोटी रकम देकर बुलाए गए।

मुर्ग तंदूरी, शराब अंगूरी

और विलास की सारी चीज़ें जरूरी

जुटाई गईं

और निर्णायक मंडल

यानी कि जूरी को दिलाई गईं।

एक हाथ से मुर्गे की टाँग चबाते हुए

और दूसरे से चाबी का छल्ला घुमाते हुए

जूरी का एक सदस्य बोला-

‘मिस्टर भोला !

यू नो

हम ऐसे करेंगे या वैसे करेंगे

बट बाइ द वे

भ्रष्टाचार नापने का पैमाना क्या है

हम फ़ैसला कैसे करेंगे ?



मिस्टर भोला ने सिर हिलाया

और हाथों को घूरते हुए फरमाया-

‘चाबी के छल्ले को टेंट में रखिए

और मुर्गे की टाँग को प्लेट में रखिए

फिर सुनिए मिस्टर मुरारका

भ्रष्टाचार होता है चार प्रकार का।

पहला-नज़राना !

यानी नज़र करना, लुभाना

यह काम होने से पहले दिया जाने वाला ऑफर है

और पूरी तरह से

देनेवाले की श्रद्धा और इच्छा पर निर्भर है।

दूसरा-शुकराना!

इसके बारे में क्या बताना !

यह काम होने के बाद बतौर शुक्रिया दिया जाता है

लेने वाले को

आकस्मिक प्राप्ति के कारण बड़ा मजा आता है।

तीसरा-हकराना, यानी हक जताना

-हक बनता है जनाब

बँधा-बँधाया हिसाब

आपसी सैटिलमेंट

कहीं दस परसेंट, कहीं पंद्रह परसेंट

कहीं बीस परसेंट ! पेमेंट से पहले पेमेंट।

चौथा जबराना।

यानी जबर्दस्ती पाना

यह देनेवाले की नहीं

लेनेवाले की

इच्छा, क्षमता और शक्ति पर डिपेंड करता है

मना करने वाला मरता है।

इसमें लेनेवाले के पास पूरा अधिकार है

दुत्कार है, फुंकार है, फटकार है।

दूसरी ओर न चीत्कार, न हाहाकार

केवल मौन स्वीकार होता है

देने वाला अकेले में रोता है।

तो यही भ्रष्टाचार का सर्वोत्कृष्ट प्रकार है

जो भ्रष्टाचारी इसे न कर पाए उसे धिक्कार है।

नजराना का एक पाइंट

शुकराना के दो, हकराना के तीन

और जबराना के चार

हम भ्रष्टाचार को अंक देंगे इस प्रकार।’



रात्रि का समय

जब बारह पर आ गई सुई

तो प्रतियोगिता शुरू हुई।

सर्वप्रथम जंगल विभाग आया

जंगल अधिकारी ने बताया-

‘इस प्रतियोगिता के

सारे फर्नीचर के लिए

चार हजार चार सौ बीस पेड़ कटवाए जा चुके हैं

और एक-एक डबल बैड, एक-एक सोफा-सैट

जूरी के हर सदस्य के घर, पहले ही भिजवाए जा चुके हैं

हमारी ओर से भ्रष्टाचार का यही नमूना है,

आप सुबह जब जंगल जाएँगे

तो स्वयं देखेंगे

जंगल का एक हिस्सा अब बिलकुल सूना है।’



अगला प्रतियोगी पी.डब्लू.डी. का

उसने बताया अपना तरीका-

‘हम लैंड-फिलिंग या अर्थ-फिलिंग करते हैं।

यानी ज़मीन के निचले हिस्सों को

ऊँचा करने के लिए मिट्टी भरते हैं।

हर बरसात में मिट्टी बह जाती है,

और समस्या वहीं-की-वहीं रह जाती है।

जिस टीले से हम मिट्टी लाते हैं

या कागजों पर लाया जाना दिखाते हैं

यदि सचमुच हमने उतनी मिट्टी को डलवाया होता

तो आपने उस टीले की जगह पृथ्वी में

अमरीका तक का आरपार गड्ढा पाया होता।

लेकिन टीला ज्यों-का-त्यों खड़ा है।

उतना ही ऊँचा, उतना ही बड़ा है

मिट्टी डली भी और नहीं भी

ऐसा नमूना नहीं देखा होगा कहीं भी।’



क्यू तोड़कर अचानक

अंदर घुस आए एक अध्यापक-

‘हुजूर

मुझे आने नहीं दे रहे थे

शिक्षा का भ्रष्टाचार बताने नहीं दे रहे थे

प्रभो !’

एक जूरी मेंबर बोला-‘चुप रहो

चार ट्यूशन क्या कर लिए

कि भ्रष्टाचारी समझने लगे

प्रतियोगिता में शरीक होने का दम भरने लगे !

तुम क्वालिफाई ही नहीं करते

बाहर जाओ-

नेक्स्ट, अगले को बुलाओ।’



अब आया पुलिस का एक दरोगा

बोला-

‘हम न हों तो भ्रष्टाचार कहाँ होगा ?

जिसे चाहें पकड़ लेते हैं, जिसे चाहें रगड़ देते हैं

हथकड़ी नहीं डलवानी दो हज़ार ला,

जूते भी नहीं खाने दो हज़ार ला,

पकड़वाने के पैसे, छुड़वाने के पैसे

ऐसे भी पैसे, वैसे भी पैसे

बिना पैसे हम हिलें कैसे ?

जमानत, तफ़्तीश, इनवेस्टीगेशन

इनक्वायरी, तलाशी या ऐसी सिचुएशन

अपनी तो चाँदी है,

क्योंकि स्थितियाँ बाँदी हैं

डंके का ज़ोर हैं

हम अपराध मिटाते नहीं हैं

अपराधों की फ़सल की देखभाल करते हैं

वर्दी और डंडे से कमाल करते हैं।’



फिर आए क्रमश:

एक्साइज वाले, इनकम टैक्स वाले,

स्लमवाले, कस्टमवाले,

डी.डी.ए.वाले

टी.ए.डी.ए.वाले

रेलवाले, खेलवाले

हैल्थवाले, वैल्थवाले,

रक्षावाले, शिक्षावाले,

कृषिवाले, खाद्यवाले,

ट्रांसपोर्टवाले, एअरपोर्टवाले

सभी ने बताए अपने-अपने घोटाले।



प्रतियोगिता पूरी हुई

तो जूरी के एक सदस्य ने कहा-

‘देखो भाई,

स्वर्ण गिद्ध तो पुलिस विभाग को जा रहा है

रजत बगुले के लिए

पी.डब्लू.डी

डी.डी.ए.के बराबर आ रहा है

और ऐसा लगता है हमको

काँस्य कउआ मिलेगा एक्साइज या कस्टम को।’



निर्णय-प्रक्रिया चल ही रही थी कि

अचानक मेज फोड़कर

धुएँ के बादल अपने चारों ओर छोड़कर

श्वेत धवल खादी में लक-दक

टोपीधारी गरिमा-महिमा उत्पादक

एक विराट व्यक्तित्व प्रकट हुआ

चारों ओर रोशनी और धुआँ।

जैसे गीता में श्रीकृष्ण ने

अपना विराट स्वरूप दिखाया

और महत्त्व बताया था

कुछ-कुछ वैसा ही था नज़ारा



विराट नेताजी ने मेघ-मंद्र स्वर में उचारा-

‘मेरे हज़ारों मुँह, हजारों हाथ हैं

हज़ारों पेट हैं, हज़ारों ही लात हैं।

नैनं छिंदति पुलिसा-वुलिसा

नैनं दहति संसदा !

नाना विधानि रुपाणि

नाना हथकंडानि च।

ये सब भ्रष्टाचारी मेरे ही स्वरूप हैं

मैं एक हूँ, लेकिन करोड़ों रूप हैं।

अहमपि नजरानम् अहमपि शुकरानम्

अहमपि हकरानम् च जबरानम् सर्वमन्यते।

भ्रष्टाचारी मजिस्ट्रेट

रिश्वतख़ोर थानेदार

इंजीनियर, ओवरसियर

रिश्तेदार-नातेदार

मुझसे ही पैदा हुए, मुझमें ही समाएँगे

पुरस्कार ये सारे मेरे हैं, मेरे ही पास आएँगे।’

साली दो

तुम शील कहो अश्लील कहो चाहे तो खुल कर गाली दो

तुम भले ना मुझको कवि मानो मत वाह-वाह की ताली दो !

पर मै तो अपने भाग्य से हर बार यही मागुंगा

तुम गौरी दो या काली दो भगवान मुझे एक साली दो !!



सीधी दो साधारण दो इतराती दो नखरे वाली दो

चाहे बाबुल की टहनी दो चाहे चम्पे की डाली दो !

पर मुझे जन्म देनेवाले ये मांग नही ठुकरा देना

असली दो चाहे जाली दो भगवान मुझे एक साली दो !!



क्योंकि वो यौवन भी क्या यौवन है जिसमे मुंह पर लाली न हुई

पलके घुंघर वाली न हुई आँखे रस की प्याली न हुई !

वो जीवन भी क्या जीवन है जिसमे मनुष्य जीजा न बना

और वो जीजा भी क्या जीजा है जिसके कोई साली न हुई !!



अरे खालो तुम प्लेटों मै लेकिन थाली की और बात

तुम रहो भले फेंकते दाव मगर खाली की और बात !

तुम मटके पर मटके पिलो लेकिन प्याली की और बात

पत्नी को रखो हरदम साथ लेकिन साली की और बात !!



पत्नी केवल अर्धांगन होती है साली सर्वांगन होती है

पत्नी तो रोती ही रहती है साली तो बखैलती रहती है !

साला भी गहरे मै जाकर अक्सर पतवार फैंक देता है

लेकिन साली जीजा की नैया को नही डुबोती है !!



विरहन पत्नी को साली ही पिया का संदेश सुनती है

अरे भोंदू पत्नी को साली ही शिकार करना सिखाती है !

दम्पति मै अगर तनाव रूस अमेरिका जैसा हो जावे

तो साली ही नहरू बनकर भटको को राह दिखाती है !!



साली है रस की प्याली सी साली क्या है रसगुल्ला है

साली है मस्त मलाई सी अथवा रबडी का कुल्ला है !

अरे पत्नी तो हर दम सिकुडी ही रहती है

साली है फाँक संतरे की जो कुछ है खुलम खुल्ला है !!



साली है चटनी पौदीने की बातो की चाह जगाती है

साली है दिल्ली का लड्डू देखो तो भूख बढाती है !

साली है मथुरा की खुरचन रस मै डूबी ही रहती है

और साली है आलू का पापड़ छूते ही शौर मचाती है !!



मुझको भी देखो यारों साली बिन जीवन सुना सा लगता है

सालो का जीजाजी कहना मुझको गाली सा लगता है !!

प्रेमिकाए

ये प्रेमिकाए बड़ी विकत होती है बिल्कुल डाक टिकट होती है!


जब ये संग निकट होती है तो आदमी की रंगीनियत मैं इजाफा हो जाता है!

और जब ये चिपक जाती है तो आदमी बिल्कुल लिफाफा हो जाता है !!

सम्बंधो के पानी से या भावनाओ के गोंद से चिपकी हुई

जब ये साथ-साथ चल पड़ती है तो अपने आप मैं हिस्ट्री हो जाती है!

कभी-कभी जिन्दगी के डाकखाने मैं उस लिफाफे की रजिस्ट्री हो जाती है!!

वैसे लिफाफा इनके साथ जिन्दगी भर रोता है!

मोहर इनके लगाती है दर्द लिफाफे को होता है!!

वैसे इनके साथ होने पर लिफाफे का अपना रंग होता है!

मगर जब ये नहीं होती तो लिफाफा बेरंग होता है!!

आप अपने जिन्दगी के लिफाफे पर किसी भी मूल्य का या आकार का टिकट चिप्काइये

लेकिन जरा कायदे से निभाइये!

किसी दूसरे का डाक टिकट अपने लिफाफे पर मत चिप्काइये!!

कहीं ऐसा न हो इससे कोई दुर्घटना घट जाए!

कोई आपके लिफाफे का डाक टिकट उड़ाने लगे तो आपका लिफाफा ही फट जाए!!

चम्बल के डाकू

चम्बल के डाकुओ ने एक सरकारी बस लूटी

मगर अभागो की किस्मत फूटी...........

लुट कर जब हिसाब मिलाया....

तो पाँच हजार से भी कम पाया....

डाकुओ ने फौरन बस रुकवाई......

लुट की एक-एक वस्तु यात्रियों को धन्यवाद सहित लौटाई

एक रिटायर थानेदार चकराया..........

डाकुओ का हर्दय परिवर्तन उसके समझ मै नही आया

वो बोला बंधू ये उदारता कैसी.....

डाकू बोले उदारता की ऐसी-की-तेसी...

हमारे पल्ले क्या पड़ता...

पाँच हजार तो थाने मै देना पड़ता.......

जनरल वार्ड

हिन्दुओ का शमसान मुसलमानो का कब्रिस्तान और ईसाईयो का ग्रेवयार्ड !
यानि भारतीय अस्पताल का जनरल वार्ड !!
वार्ड के भीतर भारतीय लोकतंत्र की तरह चरमराता पलंग !
और पलंग के ऊपर अपनी ही शवयात्रा की तैयारी करते बाबा मलंग !!
दीवार पर बैमतलब मुस्कराता महात्मा गांधी का चित्र !
और डॉक्टर ऐसे गायब जैसे नेताओं से चरित्र !!
ख़ुद अपनी असलियत पर शंका करती हुई दवाईया !
और वार्ड मै डिस्को करती हुई मौत की परछाइयाँ !!
गुलशन नंदा का उपन्यास पढ़ती हुई नर्स
और अकेली नर्स के कारण मरीज की आंखो मै पीडा के बावजूद हर्ष !
इधर-उधर देखकर मरीज ने किया नर्स के हाथ का स्पर्श !!
धीरे-से बोला आज तो मेरी जिन्दगी बनादो !
अरे कम-से-कम मरते वक़्त तो मुस्करादो !1
तुम्हारा मुस्कराना मेरे मरने मै जान डाल देगा !
नर्स बोली जान तो अवश्य डाल देगा
लेकिन तुम्हे देख कर मुस्कराई तो डॉक्टर तुमसे पहले मेरी जान निकाल देगा !!
प्राइवेट वार्ड मै होता तो मुस्कराती........?
बेवकूफ इतना भी नही जानता !
मुफ्त-खोरो के जंगल-वार्ड मै मौत के अलावा किसी को भी हंसी नही आती !!

भाईचारा

 भारत मैं सभी चीजो का भाव बढ़ रहा है...
सबसे अधिक दाम तो भाईचारे के बढ़ गए है जो किसी भी मोल मैं नही मिलता!!
राजनैतिक पार्टीयो को धन्यवाद!..जिन्होंने सिखाया कि किसी पर विश्वास न करो सब तुम्हारे शत्रु है
मौका लगे तो अपना भला करो नही तो पछताओगे............
और भाईचारा !तो सुनो भाई !यहां हर कोई एक-दूसरे के आगे चारा डालकर
भाईचारा बढ़ा रहा है1
जिसके पास डालने को चारा नहीं है उसका किसी से भाईचारा नहीं है।
और अगर वो बेचारा है तो इसका हमारे पास कोई चारा नहीं है।........

टेन्शन है......?

नेता को भाषण की, जनता को राशन की,और सरकार को शाशन की बहुत टेन्शन है.....
मगर आप को.....?
अमीर को नोटों की,नेता को वोटो की,और हिरोइन को होठों की बहुत टेन्शन है.........
मगर आप को........?
शराबी को बोतल की, मैनेजर को होटल की,और कैशियर को टोटल की बहुत टेन्शन है.........
मगर आप को........?
पडौसी को खिड़की की, कंवारे को लड़की की, और बैकार को कड़की की बहुत टेन्शन है.........
मगर आप को........?
भूखे को खाने की, गायक को गाने की, और बहु को ताने की बहुत टेन्शन है.........
मगर आप को........?
पंडित को भगवन की, मुल्ला को रहमान की,और शरीफ को बईमान की बहुत टेन्शन है.........
मगर आप को........?
प्रोड्यूसर को फ़िल्म की, नशेडी को चिलम की,और ज्ञानी को इल्म की बहुत टेन्शन है.........
मगर आप को........?
पिता को दहेज़ की, दुल्हन को सेज की,और कलर्क को मिसेज की बहुत टेन्शन है.........
मगर आप को........?
ग्रहणी को काम की, अमीर को नाम की,और गरीब को शाम की बहुत टेन्शन है.........
मगर आप को........?
मेजबान को मेहमान की,गरीबो को जान की,और बुड्ढों को सम्मान की बहुत टेन्शन है.........
मगर आप को........?
बाँस को लिली की,चूहे को बिल्ली की,और नेता को दिल्ली की बहुत टेन्शन है.........
मगर आप को........?

आवारा कुत्ते

नगरपालिका का विज्ञापन - आवारा कुत्ते पकड़ कर लाइये!......ईनाम मैं पाँच रूपये पाइए........
कुत्ते पकड़ कर पेट भरेगा............

अगर किसी कुत्ते ने काट लिया तो बिचारा कुत्ता ही मरेगा........

भाई साहब इस शहर के कुत्ते उल्लू नही है जो हमारी पकड़ मैं आजायेगे

साले सब ग्रेजुएट है पहले ही भाग जायेगे.......कहकर मित्र ख़ुद ही गायब हो गये.....

मगर हमने हिम्मत नही हारी

आवारा कुत्तों के लिए शहर की गली-गली छान मारी

दोपहर होत-होते एक दिखा लटके-लटके कान थे

बदन पर खुजली के निशान थे

गाना गा रहा था........

आवारा हूँ-आवारा हूँ या गर्दिश मैं हूँ आसमान का तारा हूँ

हमने कहा इसीलिए तो मैं आपके पीछे-पीछे आ रहा हूँ

वो बोला आपकी तारीफ़...हम बोले अपनी तारीफ़ अपने मुंह से क्या सुनाये

सोचते है जरा आपको नगरपालिका तक घुमालाये

आप हमारे साथ नगरपालिका तक चलेगे

वो बोला वहाँ तो पहले ही बहुत है मुझे और वहाँ ले जाकर क्या करेगे

हमने कहा आप नही जानते आज की तारीख मैं आप का चहरा हमारे लिए पाँच रुपये का नोट है

वो बोला ये तो मैं पहले ही समझ गया जरुर तुम्हारे मन मैं कोई खोट है

तभी तो सोचु के आज तक किसी कुत्तिया ने इतने प्यार से नही देखा आप क्यों देख रहे है

मुझे क्या पता था की आप मुझे सड़क के स्वर्ग से उठाकर नगरपालिका के नरक मैं फेंक रहे है

नही-नही मैं हरगिज नही जाउगा............

मुझे डर है अगर पाँच मिनट भी आप के साथ रहा तो मैं जानवर से आदमी बन जाऊंगा

आप ही बताइये अगर आदमी हो गया तो अपने बरादरी को क्या मुंह दिखाऊंगा

कुत्ता दुम दबा कर भागा

मगर हमने अपना संकल्प नही त्यागा

हमारी भूखी निगाहें आगे बढ़ी

और एक दरवाजे के नेम प्लेट पर पड़ी

बड़े-बड़े अक्षरों मैं लिखा था

श्रीमान सत्यवादी रिटायर पुलिस कप्तान

निचे बारीक अक्षरों मैं लिखा हुआ था कुत्ते से सावधान

हमने सोचा पुलिस कप्तान और सत्यवादी

जिज्ञासा वंश घंटी दबादी

एक झुर्रीदार चहरा बहार आया माथे पर तनाव था

आंखो मैं रिटायरमेंट का घाव था......बोला फरमाइये

हमने कहा हमे कुछ आवारा कुत्ते चाहिए

आप की कस्टडी मैं हो तो बताइये

वो उदास हो गये दुखी स्वर मैं बोले

कुत्ते तो है मगर आवारा नही है

और जो आवारा है वो कुत्ते नही है

हमने कहा मतलब-बोले मतलब साफ है कुत्ता तो हमारा टाप है

मगर लडके की मत पूछना वो साला नटवरलाल का भी बाप है

आज ही जमानत पर छुटा है आप के काम आता हो तो बताइये

हमने कहा कप्तान साहब जो माल आपसे नही खपा वो हमें मत टिकाइए

आप के कपूत हमारे क्या काम आयेगे

पुलिस वाले की ओलाद है हमें और बेच खायेगे.............

हम दुबारा सड़क पर आगये!

निराश घर की तरफ़ लौट रहे थे के एक अन्तिम कुत्ते से टकरागये

हमने चलते-चलते उसे भी मक्खन लगाया

हमने कहा आप तो काफ़ी खानदानी लगते है क्या हमारे साथ नगरपालिका तक चल सकते है

जबाब मैं कुत्ता मुस्कुराया बोला जरुर चलेगें

बल्कि दो चार को और साथ ले चलेगे मगर आप कमीशन क्या देंगे

हमने कहा कैसा कमीशन.......वो बोला ....

नाटक मत करो श्रीमान आपका सारा प्लान जानता हूँ

जानवर हूँ मगर आदमी को ज्यादा पहचानता हूँ

आज का अखबार मैंने पढ़ लिया है

पाँच रुपये का नोट अकेले ही खाओगे

और हमको चाय भी नही पिलाओगे

भाई साहब जो खेल आप आज शुरू कर रहे है

वो हम पिछले पाँच साल से खेल रहे है

१५-२० कुत्ते रोज गाड़ी मैं धकेल रहे है

इस इलाके मैं बड़ा माल है

फिर नगरपालिका का आदमी अपना दलाल है

रोज सुबह आता है १५-२० कुत्ते पकड़ कर ले जाता है

रात के अंधेरे मैं वापस छोड़ जाता है

आधे पैसे उसके आधे हमारे....

और कुत्ते वंही के वंही सारे

अब बोलो क्या ख्याल है....

हमने कहा कमाल है.......आपको तो पोलेटिक्स मैं होना चाहिए था

वो बोला पहले मैं वंही था

मगर पार्टी से निकाला गया हूँ फ़िर कंही का नही था

अब तो पुरी तरह फ्लॉप हूँ ...

हमने कहा नही-नही आप ये क्यों सोचते है की आप फ्लॉप है

आप तो आज भी अच्छो-अच्छो से टाप है

किसे दिन हमारे यहाँ तशरीफ लाइये

मैं एक पत्रकार हूँ आपका इंटरव्यू चाहिए

और अकेले नही हो सके तो हमारे भाभीजी को भी साथ लाइये

इस बात पर कुत्ता शरमा गाया.......

बोला जी नही अभी तो मैं बेचलर हूँ कोई आपके घर मैं हो तो बताईये..........