चम्बल के डाकुओ ने एक सरकारी बस लूटी
मगर अभागो की किस्मत फूटी...........
लुट कर जब हिसाब मिलाया....
तो पाँच हजार से भी कम पाया....
डाकुओ ने फौरन बस रुकवाई......
लुट की एक-एक वस्तु यात्रियों को धन्यवाद सहित लौटाई
एक रिटायर थानेदार चकराया..........
डाकुओ का हर्दय परिवर्तन उसके समझ मै नही आया
वो बोला बंधू ये उदारता कैसी.....
डाकू बोले उदारता की ऐसी-की-तेसी...
हमारे पल्ले क्या पड़ता...
पाँच हजार तो थाने मै देना पड़ता.......
मगर अभागो की किस्मत फूटी...........
लुट कर जब हिसाब मिलाया....
तो पाँच हजार से भी कम पाया....
डाकुओ ने फौरन बस रुकवाई......
लुट की एक-एक वस्तु यात्रियों को धन्यवाद सहित लौटाई
एक रिटायर थानेदार चकराया..........
डाकुओ का हर्दय परिवर्तन उसके समझ मै नही आया
वो बोला बंधू ये उदारता कैसी.....
डाकू बोले उदारता की ऐसी-की-तेसी...
हमारे पल्ले क्या पड़ता...
पाँच हजार तो थाने मै देना पड़ता.......
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