Saturday, December 22, 2012

आवारा कुत्ते

नगरपालिका का विज्ञापन - आवारा कुत्ते पकड़ कर लाइये!......ईनाम मैं पाँच रूपये पाइए........
कुत्ते पकड़ कर पेट भरेगा............

अगर किसी कुत्ते ने काट लिया तो बिचारा कुत्ता ही मरेगा........

भाई साहब इस शहर के कुत्ते उल्लू नही है जो हमारी पकड़ मैं आजायेगे

साले सब ग्रेजुएट है पहले ही भाग जायेगे.......कहकर मित्र ख़ुद ही गायब हो गये.....

मगर हमने हिम्मत नही हारी

आवारा कुत्तों के लिए शहर की गली-गली छान मारी

दोपहर होत-होते एक दिखा लटके-लटके कान थे

बदन पर खुजली के निशान थे

गाना गा रहा था........

आवारा हूँ-आवारा हूँ या गर्दिश मैं हूँ आसमान का तारा हूँ

हमने कहा इसीलिए तो मैं आपके पीछे-पीछे आ रहा हूँ

वो बोला आपकी तारीफ़...हम बोले अपनी तारीफ़ अपने मुंह से क्या सुनाये

सोचते है जरा आपको नगरपालिका तक घुमालाये

आप हमारे साथ नगरपालिका तक चलेगे

वो बोला वहाँ तो पहले ही बहुत है मुझे और वहाँ ले जाकर क्या करेगे

हमने कहा आप नही जानते आज की तारीख मैं आप का चहरा हमारे लिए पाँच रुपये का नोट है

वो बोला ये तो मैं पहले ही समझ गया जरुर तुम्हारे मन मैं कोई खोट है

तभी तो सोचु के आज तक किसी कुत्तिया ने इतने प्यार से नही देखा आप क्यों देख रहे है

मुझे क्या पता था की आप मुझे सड़क के स्वर्ग से उठाकर नगरपालिका के नरक मैं फेंक रहे है

नही-नही मैं हरगिज नही जाउगा............

मुझे डर है अगर पाँच मिनट भी आप के साथ रहा तो मैं जानवर से आदमी बन जाऊंगा

आप ही बताइये अगर आदमी हो गया तो अपने बरादरी को क्या मुंह दिखाऊंगा

कुत्ता दुम दबा कर भागा

मगर हमने अपना संकल्प नही त्यागा

हमारी भूखी निगाहें आगे बढ़ी

और एक दरवाजे के नेम प्लेट पर पड़ी

बड़े-बड़े अक्षरों मैं लिखा था

श्रीमान सत्यवादी रिटायर पुलिस कप्तान

निचे बारीक अक्षरों मैं लिखा हुआ था कुत्ते से सावधान

हमने सोचा पुलिस कप्तान और सत्यवादी

जिज्ञासा वंश घंटी दबादी

एक झुर्रीदार चहरा बहार आया माथे पर तनाव था

आंखो मैं रिटायरमेंट का घाव था......बोला फरमाइये

हमने कहा हमे कुछ आवारा कुत्ते चाहिए

आप की कस्टडी मैं हो तो बताइये

वो उदास हो गये दुखी स्वर मैं बोले

कुत्ते तो है मगर आवारा नही है

और जो आवारा है वो कुत्ते नही है

हमने कहा मतलब-बोले मतलब साफ है कुत्ता तो हमारा टाप है

मगर लडके की मत पूछना वो साला नटवरलाल का भी बाप है

आज ही जमानत पर छुटा है आप के काम आता हो तो बताइये

हमने कहा कप्तान साहब जो माल आपसे नही खपा वो हमें मत टिकाइए

आप के कपूत हमारे क्या काम आयेगे

पुलिस वाले की ओलाद है हमें और बेच खायेगे.............

हम दुबारा सड़क पर आगये!

निराश घर की तरफ़ लौट रहे थे के एक अन्तिम कुत्ते से टकरागये

हमने चलते-चलते उसे भी मक्खन लगाया

हमने कहा आप तो काफ़ी खानदानी लगते है क्या हमारे साथ नगरपालिका तक चल सकते है

जबाब मैं कुत्ता मुस्कुराया बोला जरुर चलेगें

बल्कि दो चार को और साथ ले चलेगे मगर आप कमीशन क्या देंगे

हमने कहा कैसा कमीशन.......वो बोला ....

नाटक मत करो श्रीमान आपका सारा प्लान जानता हूँ

जानवर हूँ मगर आदमी को ज्यादा पहचानता हूँ

आज का अखबार मैंने पढ़ लिया है

पाँच रुपये का नोट अकेले ही खाओगे

और हमको चाय भी नही पिलाओगे

भाई साहब जो खेल आप आज शुरू कर रहे है

वो हम पिछले पाँच साल से खेल रहे है

१५-२० कुत्ते रोज गाड़ी मैं धकेल रहे है

इस इलाके मैं बड़ा माल है

फिर नगरपालिका का आदमी अपना दलाल है

रोज सुबह आता है १५-२० कुत्ते पकड़ कर ले जाता है

रात के अंधेरे मैं वापस छोड़ जाता है

आधे पैसे उसके आधे हमारे....

और कुत्ते वंही के वंही सारे

अब बोलो क्या ख्याल है....

हमने कहा कमाल है.......आपको तो पोलेटिक्स मैं होना चाहिए था

वो बोला पहले मैं वंही था

मगर पार्टी से निकाला गया हूँ फ़िर कंही का नही था

अब तो पुरी तरह फ्लॉप हूँ ...

हमने कहा नही-नही आप ये क्यों सोचते है की आप फ्लॉप है

आप तो आज भी अच्छो-अच्छो से टाप है

किसे दिन हमारे यहाँ तशरीफ लाइये

मैं एक पत्रकार हूँ आपका इंटरव्यू चाहिए

और अकेले नही हो सके तो हमारे भाभीजी को भी साथ लाइये

इस बात पर कुत्ता शरमा गाया.......

बोला जी नही अभी तो मैं बेचलर हूँ कोई आपके घर मैं हो तो बताईये..........

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