थाली से छोटा होता है चमचा
डोंगे से छोटा होता है चमचा
कटोरी से छोटा होता है चमचा
पर साहब की थाली मैं पड़ा इतराता
बहुत बड़ा होता है चमचा
साहब को ठेके के चावल खिलाता है चमचा
साहब को कमीशन का हलवा खिलाता है चमचा
तन्वंगी भिंडी का स्वाद चखाता है चमचा
शाही ठाठ से पनीर खिलाता है चमचा
बहुत ही त्यागी होता है चमचा
साहब का भरता है पेट
ख़ुद खाली पेट रहता है चमचा
साहब के मुहं मे आ जाये कंकर अगर
हंसकर झूठन उठता है चमचा
खुशी से फुला नही समाता है चमचा
जब साहब के हाथो मे होता है चमचा
जब साहब के होठों को छूता है चमचा
बौने नजर आते है सब
साहब बन जाता है साहब ...का चमचा
साहब के साहब की पार्टी मे
छोटा बड़ा सब तरह का होता है चमचा!
जगमगाते विदेशी बर्तनों के बीच
टेबल पर चांदी का सजता है चमचा!
छोटे मोटे दोस्तों की पार्टी के बीच
स्टील का चलता है चमचा
मे तो हाथ से खालूंगा साहब बोला चमचा
चमचे को नसीब नही होता चमचा
साहब के कच्चे कानो मे कुछ फुसफुसाता है चमचा
पर निंदा का रस पिलाता है चमचा
सावन का अँधा होगता है साहब
कुछ भी नजर नही आता
नजर आता है साहब को बस साहब का चमचा
घर मे अचानक टपक पड़े साहब अगर
फुला नही समाता है चमचा
सारा घर बन जाता है चमचे का चमचा
मेरे साहब आज मेरे घर आए
टेलीफोन पर ताजा समाचार पढ़कर
चमचों को सुनाता है चमचा
चमचमाती दुनिया मे प्यारे
हर कोई किसी न किसी का चमचा!
कोई अपनी पत्नी का चमचा
कोई दुसरे की बीबी का चमचा
कोई साहब का चमचा तो कोई साहिबा का चमचा!..................
डोंगे से छोटा होता है चमचा
कटोरी से छोटा होता है चमचा
पर साहब की थाली मैं पड़ा इतराता
बहुत बड़ा होता है चमचा
साहब को ठेके के चावल खिलाता है चमचा
साहब को कमीशन का हलवा खिलाता है चमचा
तन्वंगी भिंडी का स्वाद चखाता है चमचा
शाही ठाठ से पनीर खिलाता है चमचा
बहुत ही त्यागी होता है चमचा
साहब का भरता है पेट
ख़ुद खाली पेट रहता है चमचा
साहब के मुहं मे आ जाये कंकर अगर
हंसकर झूठन उठता है चमचा
खुशी से फुला नही समाता है चमचा
जब साहब के हाथो मे होता है चमचा
जब साहब के होठों को छूता है चमचा
बौने नजर आते है सब
साहब बन जाता है साहब ...का चमचा
साहब के साहब की पार्टी मे
छोटा बड़ा सब तरह का होता है चमचा!
जगमगाते विदेशी बर्तनों के बीच
टेबल पर चांदी का सजता है चमचा!
छोटे मोटे दोस्तों की पार्टी के बीच
स्टील का चलता है चमचा
मे तो हाथ से खालूंगा साहब बोला चमचा
चमचे को नसीब नही होता चमचा
साहब के कच्चे कानो मे कुछ फुसफुसाता है चमचा
पर निंदा का रस पिलाता है चमचा
सावन का अँधा होगता है साहब
कुछ भी नजर नही आता
नजर आता है साहब को बस साहब का चमचा
घर मे अचानक टपक पड़े साहब अगर
फुला नही समाता है चमचा
सारा घर बन जाता है चमचे का चमचा
मेरे साहब आज मेरे घर आए
टेलीफोन पर ताजा समाचार पढ़कर
चमचों को सुनाता है चमचा
चमचमाती दुनिया मे प्यारे
हर कोई किसी न किसी का चमचा!
कोई अपनी पत्नी का चमचा
कोई दुसरे की बीबी का चमचा
कोई साहब का चमचा तो कोई साहिबा का चमचा!..................
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