जीवन मैं फल पाने की लिए,श्रम तो करना पड़ता है ईश्वर सिर्फ लकीरे देता,रंग स्वंय ही भरना पड़ता है! जो बीच राह मैं बैठ गए,वे बैठे ही रह जाते है जो लगातार चलते रहते है,वे निश्चय ही मंजिल पाते है! कर्म तेरे अच्छे है बन्दे, तो भाग्य तेरा दास है धरा की तो बात ही क्या,कदमो मैं आकाश है! मेरा मानना है की "जिस कार्य को नौकर, भाई, पुत्र अथवा,पति,पत्नी भी नही कर सकते,उसी कार्य को मित्र निश्चित रूप से कर दिखायेगे! इसलिए मित्रों का स्थान ऊँचा है!"……..” आनंद सिंह,”
Friday, June 20, 2008
इन्सानी कुत्ते
एक सिपाही एक कुत्ते को बांधैं लाया
सिपाही ने जब कटघरे में आ कुत्ते को खोला
कुत्ता रहा चुपचाप, मुंह से कुछ नही बोला
नुकिले दाँदां में कुछ खून-सा नज़र आ रहा था
चुपचाप था कुत्ता, किसी से नजर नही मिला रहा था
हुआ खड़ा एक वकील
देने लगा दलील
बोला, ये ज़ालिम पेचीदा है
जज सॉब ये कुत्ता है
इसने जो साख कमाई है
देख कै इन्सानियत घबराई है
क्रुर है, निर्दयी है, इसने बहुत तबाही मचाई है
दो दिन पहले जन्मी एक कन्या, अपने दांतों से खाई है
अब कतई ना देखो बाट
उतारो इसको मौत के घाट
जज का गया खून खोल
तू क्यूँ खाई कन्या अबे बोल
हुक्म आप इसे जिंदा रहने मत दो
कुत्ते का वकील बोला, इसे भी कुछ कहने तो दो
तब कुत्ते ने अपना मुँह खोला
बड़े ही सहज सुर मैं वो बोला
हाँ, मैंने वो कन्या खाई है
अपनी कुत्तानियत निभाई है
कुत्ते का धर्म है नही दया दिखाना
माँस चाहे किसी-का हो, बस खा जाना
पर मैं दया-धर्म से दूर नही
खाया तो है, पर मेरा कसूर नही
मुझे पता है, जब वो बच्ची गई फैकाई
और कोई नही, उसकी माँ ही उसे फेंकने आई
जब मैं उस कन्या के गया पास
उसकी आंखो मैं देखा भोला विश्वास
जब वो मेरी जीभ देख कै मुस्काई थी
कुत्ता हूँ, पर उसने मेरे अन्दर इन्सानियत जगाई थी
मैंने सूंघ- कर बड़ी मुश्किल से वो घर खोजा था
जहाँ थी माँ उसकी, और बालक भी सोया था
मैंने कू-कू करकै वो माँ जगाई
पूछा तुने वो, कन्या क्यों फैकाई
चल, मेरे पीछे, उसे लै कै आ
भूखी है वो, उसे अपना दूध पिला
माँ सुनते ही रोने लगी
अपने दुखडे धोने लगी
बोली, नही लाऊँगी अपने कलेजे के टुकड़े को
कैसे कर खोल बताऊँ अपने मन के दुखड़ै को
मेरे घर पहले ही चार छोरीयाँ है
दो को बुखार है, और दो चटाई पै सो रई है
मेरी सास मारै है ताना की मार
मुझे पीटने आता मेरा भरतार
बोला, फिर छोरी ले आई
कैसे होगी इनकी ब्याह सगाई
वंश की तुने काट दी बेल
जा खत्म कर दे इसका खेल
माँ हूँ, पर थी मेरी लाचारी
तब फैंक आई, छोरी प्यारी
कुत्ते का गला भर गया
पर ब्यान वो पुरा कर गया
बोला, मैं फिर वापस आ गया
दिमाग मैं मेरे धुंआ सा छा गया
वो कन्या अंगूठा चूस रही थी
हँसी ऐसे जैसे मेरे इन्तजार में जाग रही थी
कलेजे पै धर लिया मैंने पात्थर
थर-थर काँपने लगा मेरा ज़ॉथर
बोला, ऐ बावली, जी कै, क्या करेगी
दूध नही, जहर है, पी कै, क्या करेगी
हम कुत्तो को करते है बदनाम
हम से ज्यादा घिनौने करते है काम
कब ज़िन्दी अरक दे पेट मैं मरवाते है
और अपने आप को इन्सान बताते है
मेरे मन मैं भय कर गई उसकी मुस्कान
मैंने आज इतना तो लिया जान
जो समाज इस-से नफरत करता है
कन्या हत्या-सी गन्दी हरकत करता है
वहाँ-से तो इसका जाना अच्छा
इसका तो मर जाना अच्छा
तुम लटकाओ मुझे फांसी, चाहे मारो जूत्ते
पर ढूढ कै लाओ पहले वो इन्सानी कुत्ते
पर ढूढ कै लाओ पहले वो इन्सानी कुत्ते
किसका दोष
इक सागर के पेट मै तपके और मोती बन जाए
दूजी गंदे जल मै गिर कर अपना आप गवाए
किसको मुजरिम समझे कोई किसका दोष लगाए
दो कलियाँ गुलशन की..........
इक सहरे के बिच गुंथे और मन ही मन इतराए
इक अर्थी की भेंट चढ़े और धूलि मै मिल जाए
किसको मुजरिम समझे कोई किसका दोष लगाए
दो सखियाँ बचपन की..........
इक सिंघासन पर बैठे और रूपमती कहलाये
दूजी अपने रूप के कारण गलियों मै बिक जाए
किसको मुजरिम समझे कोई किसका दोष लगाए
Friday, June 13, 2008
कसुतो कुत्तो....
एक सिपाही एक कुत्ते नै बांधैं ल्यायो
सिपाही जद कटघरे में आ कुत्ते ने खोल्यो
कुत्तो रहग्यो चुपचाप, मुंडे-उ कि-नई बोल्यो
नुकिले दाँदां में कीं खून-सो नज़र आवै हो
चुपचाप हो कुत्तो, किसुं नजर नई मिलावै हो
होयो खडो एक वकील
देण लाग्या दलील
बोल्यो, ओ ज़ालिम कसुतो है
जज सॉब ओ कुत्तो है
ई जकि करणी कमाई है
देख कै इन्सानियत घबराई है
क्रुर है, निर्दयी है, ई घणी तबाही मचाई है
दो दिन पहल्या जन्मी एक छोरी, आपणे दाँदां ऊं खाई है
अब कतई ना देखो बाट
उतारो ई नै मौत रे घाट
जज को गयो खून खोळ
तू क्यूँ खाई कन्या अबे बोल
हुक्म थै इनै जिन्दो रहण मत दयो
कुत्ते रो वकील बोल्यो, ई नै भी कुछ कहण तो दयो
जणे कुत्तो आपरो मुँह खोल्यो
बड़ी सहज सुर मैं वो बोल्यो
हाँ, मैं वा कन्या खाई है
अपणी कुत्तानियत निभाई है
कुत्ते को धर्म है नही दया दिखाणो
माँस चाहे किरो-ही हो, बस खा ज्याणो
पर मैं दया-धर्म सूं दूर नही
खायो तो है, पण म्हारो कसूर नही
मन्नै पतों है, जद वा छोरी गई बगाई
और कोई नही, बिरी माँ ही बिने फैंकण आई
जद मैं उण कन्या रे गियो पास
बिरी आँख्यां मैं देख्यो भोलो विश्वास
जद वा म्हारी जीभ देख कै मुस्काई ही
कुत्तो हूँ, पण बिण म्हारे अन्दर इन्सानियत जगाई ही
मैं सूंघ-सूंघ बड़ी मुश्किल वो घर जोयो हो
जठे ही माँ बिण-री, अर बाबू भी सोयो हो
मैं कू-कू करकै वा माँ जगाई
पुछ्यो थुं वा, कन्या क्याँ बगाई
चॉल, म्हारे लारे, बिने लै कै आ
भूखी है वा, बिने थारो दूध पिला
माँ सुणताँ ही रोण लागगी
अपारो दुखड़े धोण लागगी
बोली, कोनी लाऊँ अपणै कॉलजे रे टुकड़े नै
कियां कर खोल बताऊँ म्हारे मन रे दुखड़ै नै
म्हारे घरे पहल्याँ ही चार छोरयाँ है
दो नै बुखार है, अर दो चटाई पै सो री है
म्हारी सासू मारै है ताना री मार
मन्नै पीटण आवे म्हारो भरतार
बोल्यो, फेर छोरी ले आई
कियां हुवेला इयांरी ब्याह सगाई
वंश की तूं काट दी बेल
जा खत्म कर दे इणरो खेल
माँ हूँ, पण ही म्हारी लाचारी
जणे फैंक आई, छोरी प्यारी
कुत्ते रो गलो भरग्यो
पर ब्यान वो पुरो करग्यो
बोल्यो, मैं पछे पाछो आग्या
दिमाग मैं म्हारे धुंओ सो छाग्यो
वा छोरी अन्गुठो चूसण लाग री
हाँसी इयाँ जाणे म्हारे बाट में जाग री
कॉलजै पै धर लिया मैं पात्थर
थर-थर कंपयो म्हारो ज़ॉथर
बोल्यो, ऐ बावली, जी कै, काई करेली
दूध नही, जहर है, पी कै, काई करेली
म्हाँ कुत्तां नै करे है बदनाम
म्हारै सूं ज्यादा घिनौना करैं है काम
कदे ज़िन्दी अरक दे पेट मैं मरवावै है
अर आपणै आप नैं इन्सान बतावै है
म्हारे मन मैं भय करगी बिरी मुस्कान
मैं आज इत्तो तो लियो ज़ॉण
जको समाज इण-सूं नफरत करै है
कन्या हत्या-सी गन्दी हरकत करै है
बठे-उ तो इरो ज्याणो चोखो
इरो तो मर ज्याणो चोखो
थे लटकाओ मन्नै फांसी, चाहे मारो जूत्ते
पण ढूढ कै ल्याओ पहल्याँ वे इन्सानी कुत्ते
पण ढूढ कै ल्याओ पहल्याँ वे इन्सानी कुत्ते
Tuesday, May 20, 2008
ढूंढ रहा हूँ!.....
फिर भी ढूंढ रहा हूँ मैं............
वेश्या की आँखों मैं लज्जा,नेता की आँखों मैं चरित्र,
प्रेम का बन के निगहबान मुझे चाहेगा मिले वो इत्र,
और मरकर भी चाहे मित्र को मित्र कहाँ है ऐसा मित्र,
Sunday, April 27, 2008
रिश्ते
कुछ बहुत अजीज तो कुछ काफ़ी करीब होते है!
कुछ हम बनाते है अपनी मर्जी से,
कुछ खुदगर्जी से "आनंद"कुछ किस्मत से नसीब होते है!!
होगा!
जिस दिन आपको अपने हाथो से बनाया होगा,
उसने भी बहाये होगे आंसू,
जिस दिन आपको यहाँ खुदा ने भिजवाया होगा,
और खुदा ने ख़ुद को बिल्कुल तन्हा पाया होगा!
हमे बना के खुदा खूब पछताया होगा,
तभी पीछा छुडाने अपना मुझे बीकानेर भिजवाया होगा,
की तरह
कर गये हिसाब हमसे सूद-खोर की तरह!
हिफाजत की बनके फानूस जिस शमां की,
दे दी सुपारी मेरे कत्ल की,खूंखोर की तरह!
जिन्हें तालीम दी दिन-ओ-दुनिया की मौलवी की तरह,
खड़े है उसी के दरबार मैं गुनाहगार की तरह!
इंसान की क्या हस्ती है,वक्त है ताकतवर,
इंसान से ना सही, कुछ भगवान से डरा कर!
ऐ मेरे भगवान!बस कर,और बुरा वक्त ना दिखा,
वरना हम भी बेच आयेगे ईमान नेताओं की तरह!
Saturday, April 26, 2008
बुलंद हौसले
पूछोगे उस दिए से तों वो मेरा पता बतायेगा !
घर से चला हूँ मकसद मंजिल है जहन मैं,
मुसीबत को कुचलता हूँ रास्ता बनता जाता है!
बुलंद हौसले होते है जिनके मंजिले कदम चूमती है,
बुजदिलो का तो इस दुनिया मैं जीना ही बेकार है !
क्यूँ बेचते हो अपना ईमान तन मन वतन को,
क्या करेगा वो हासिल जो ख़ुद बिकने को तैयार है!
जीवन से तंग हो तो फ़िर जीते क्यों हो ,
जान प्यारी भी नहीं जान से जाते भी नहीं!
रूप
तेरा रूप हमेशा कायम है दम भर के लिए रंगीन है ये !....
ये आँख अगर जो उठ जाए हर एक सितारा सजदा करे
आ जाये कहीं होठो पे हसीं बिजली भी तड़फ कर आह: भरे....
ये जुल्फ अगर जो खुल जाए रातो की जवानी शरमाये
रफ़्तार का आलम क्या कहिये बहता हुआ दरिया थम जाए....
दिन रात महकना कलियों ने अदा तुमसे ही पायी
ये चाँद जो घटता बढ़ता है दरअसल है तेरी अंगडाई....
Thursday, April 24, 2008
है? सच
जब यही जीना है दोस्तों तो फ़िर मरना क्या है?
पहली बारिश में ट्रेन लेट होने की फ़िक्र है
भूल गये भीगते हुए टहलना क्या है?
सीरियल्स् के किर्दारों का सारा हाल है मालूम
पर माँ का हाल पूछ्ने की फ़ुर्सत कहाँ है?
अब रेत पे नंगे पाँव टहलते क्यूं नहीं?
१०८ हैं चैनल् फ़िर दिल बहलते क्यूं नहीं?
इन्टरनैट से दुनिया के तो टच में हैं,
लेकिन पडोस में कौन रहता है जानते तक नहीं.
मोबाइल, लैन्डलाइन सब की भरमार है,
लेकिन जिग्ररी दोस्त तक पहुँचे ऐसे तार कहाँ हैं?
कब डूबते हुए सुरज को देखा त, याद है?
कब जाना था शाम का गुज़रना क्या है?
तो दोस्तों शहर की इस दौड़ में दौड़् के करना क्या है
जब् यही जीना है तो फ़िर मरना क्या है !!!
Wednesday, April 23, 2008
दुखी करे......
क्रषे ने काळ मच्छ्ली ने जाळ बूढाप्पे मैं साळ दुखी करे.......
बाणीये ने ब्याज गौदाम मैं पड्यो अनाज माईळी खाज दुखी करे.......
भाई ने भाई सासू ने जंवाई बिगड्योडे ब्याव ने नाई दुखी करे.......
हिन्ये मैं काळओ अणुतो चाळओ आवतो-जावतो सियाळओ दुखी करे......
दारु दान जी
पण हुवे बडो अफ़सोस उतरयाँ दारु दान जी !
चूल्हा चौक चौबारा उठग्या
जैबां माथे हाथे डाका पड़ग्या
अरे राजा रा राजवाडा लुटग्या
ओ से करमा को दोष पण चाईजे आतो रोज
हुवे बडो अफ़सोस उतरयाँ दारु दान जी !.......
कल्लाळी आ कामण करगी
घर आळी री सौतण बणगी
लत काँई पड़गी चित मैं चढ़गी
आ तो भख ले वे रोज मदवा उड़ावे मौज
हुवे बडो अफ़सोस उतरयाँ दारु दान जी !........
कल्लाळी रे खातर करे दन्द-रा-फंद
राषण को तो फाको नई करो इको प्रबंद
घर का जाणे मरगयो आप करो "आनंद",
मदवा पड्या मदहोश ऊपर कुत्ता रा खोज
हुवे बडो अफ़सोस उतरयाँ दारु दान जी !.........
Tuesday, April 22, 2008
नेता का पहाडा
नेता दुए दुःख देता!
नेता तीये तिकड़म बाज!
नेता चौके चार सौ बीस !
नेता पंजे पंच-पड़-पंच!
नेता छके छंटा हुआ !
नेता सत्ते सत्ताधारी !
नेता अठ्ठे अकडूराम!
नेता नंवे नमकहराम!
नेता दहाई दग्गाबाज!
जहाँ पर ऐसे नेता का राज!
वहाँ का समझो सत्यानाश !!
सिर्फ अपने लिए करे दन्द-का-फंद!
जनता भले मरजाये आप करे आनंद......
Monday, April 21, 2008
किसको ख़बर है..
जीना भी मुश्किल होगा मर भी ना पायेगे!
मुझ जैसो का जीना क्या और मरना क्या
आज इस महफ़िल से उठे कल दुनिया से उठ जायेगे!!
ऐसा भी होता है!

तकदीर के जालिम हाथो मै मन खून के आंसू रोता है!!
नित दिन मै चरागाह रहता था ख़ाक उड़ती है उन ऐवानो मै!
मखमल पे न जो रखते थे कदम फिरते है रेगिस्तानों मै!!
रहने का ठिकाना कोई नही रुकने का बहाना कोई नही!
इस हाल मै काम आने वाला अपना बैगाना कोई नही!!
दुनिया मै किसी को भी अपनी किस्मत का लिखा मालूम नही!
सामान है लाखो बरसों का पर कल का पता मालूम नही!!
Sunday, April 20, 2008
भाईचारा
सबसे अधिक दाम तो भाईचारे के बढ़ गए है
जो किसी भी मोल मैं नही मिलता!!
राजनैतिक पार्टीयो को धन्यवाद!..जिन्होंने सिखाया कि
किसी पर विश्वास न करो सब तुम्हारे शत्रु है
मौका लगे तो अपना भला करो नही तो पछताओगे............
और भाईचारा !तो सुनो भाई !यहां हर कोई एक-दूसरे के आगे
चारा डालकरभाईचारा बढ़ा रहा है1
जिसके पास डालने को चारा नहीं है
उसका किसी से भाईचारा नहीं
अगर वो बेचारा है तो इसका हमारे पास कोई चारा नहीं है।........
टेंशन है.......
अमीर को नोटों की,नेता को वोटो की,और हिरोइन को होठों की बहुत टेन्शन है.........मगर आप को........?
शराबी को बोतल की, मैनेजर को होटल की,और कैशियर को टोटल की बहुत टेन्शन है.........मगर आप को........?
पडौसी को खिड़की की, कंवारे को लड़की की, और बैकार को कड़की की बहुत टेन्शन है.........मगर आप को........?
भूखे को खाने की, गायक को गाने की, और बहु को ताने की बहुत टेन्शन है.........मगर आप को........?
पंडित को भगवन की, मुल्ला को रहमान की,और शरीफ को बईमान की बहुत टेन्शन है.........मगर आप को........?
प्रोड्यूसर को फ़िल्म की, नशेडी को चिलम की,और ज्ञानी को इल्म की बहुत टेन्शन है.........मगर आप को........?
पिता को दहेज़ की, दुल्हन को सेज की,और कलर्क को मिसेज की बहुत टेन्शन है.........मगर आप को........?
ग्रहणी को काम की, अमीर को नाम की,और गरीब को शाम की बहुत टेन्शन है.........मगर आप को........?
मेजबान को मेहमान की,गरीबो को जान की,और बुड्ढों को सम्मान की बहुत टेन्शन है.........मगर आप को........?
बाँस को लिली की,चूहे को बिल्ली की,और नेता को दिल्ली की बहुत टेन्शन है.........मगर आप को........?
सरकार
1 -बुढापे मैं जो हो जाए उसे हम प्यार कहते है ,
जवानी मैं जो होता है फकत व्यापार कहते है !
जहाँ हर चीज बिकती हो उसे बाजार कहते है ,
महंगाई जो बढाती है उसे ही सरकार कहते है !!
2 -कमर मैं जो लटकती है उसे सलवार कहते है,
आपस मैं जो टकराये उसे तलवार कहते है !
बगैर धक्के से चलेगी उसे हम कार मानेग,
और धक्के से चलेगी उसे ही सरकार मानेगे!!
3 -एक नये-नये मंत्री ने ड्राइवर से कहा कार हम चलायेगे,
ड्राइवर ने कहा हम निचे उतर जायेगे..........
वे कार है सरकार नही जो भगवान भरोसे चल जायेगी!!
राजस्थानी की मशहूर कहावते -2
राजस्थानी ऑखाणा -2
1 -ठालै बैठ्याँ सूँ बेगार भली ।
2 -ठिकाणे ठाकुर पूजीजै ।
3 -ठिकाणै सैं ई ठाकर बाजै ।
4 -ठोकर खार हुन्स्यार होय ।
5 -डाकण बेटा ले क दे ।
6 -डाकणां के ब्यावां में नूतारां का गटका ।
7डाकणां सै गाँव का नळा के छाना है ।
8 -दिग्मरां के गाँव में धोबी को के काम ।
9 -डूंगर चढ़तो पांगळो, सीस अणीतो भार ।
10 -डूंगर बळती दिखै, पगां बळती कोनी दिखै ।
11 -डूबतो सिंवाळां न हाथ घालै ।
12 -डेड घड़ो'र डीडवाणू पाऊँ ।
13 -ढक्योड़ो मत उघाड़ और भू घर तेरो ई है ।
14 -ढबां खेती,ढबां न्याव ।
15 -ढल्यो घोटी, हुयो माटी ।
16 -ढेढ़ को मन ल्याह्वड़ै में ही ।
17 -ढेढ़ नै सुरग में भी बेगार ।
18 -ढेढ़ रे साथे धाप'र जीमो भांवै आंगळी भर कर चाखो ।
19 -ढेढ़ रो पल्लो लगावो, भांवै बाथे पड़ो ।
20 -ढेढ़ां की दुर्सीस सूं दाव थोड़ा ई मरै ।
21 -ढेढणी और रावळै जा आई ।
22 -ढोली गावतो अर टाबर रोवतो चोखो लागै ।
23 -तंगी में कुण संगी ?
24 -तरवार को घाव भरज्या बात को कोनी भरै ।
25 -तवै की काची नै, सासरै की भाजी नै कठैई ठोड़ कोनी ।
26 -तवै चढ़ै नै धाड़ खाय ।
27 -ताता पाणी सैं कसी बाड़ बळै ।
28 -तातो खावै छायाँ सोवै, बैंको बैद पिछोकड़ रोवै ।
29 -ताळी लाग्यां ताळो खुलै ।
30 -तावळो सो बावळो ।
31 -तिरिया चरित न जाणे कोय, खसम मार के सत्ती होय ।
32 -तीज त्युंहारां बावड़ी, ले डूबी गणगौर ।
33 -तीजां पाछै तीजड़ी, होळी पाछै ढूंढ, फेरां पाछै चुनड़ी, मार खसम कै मूंड ।
34 -तीतर कै मूंडै कुसळ है ।
35 -तीतर पंखी बादळी, विधवा काजळ रेख । बा बरसे बा घर करै, ई में मीन न मेख ।।
36 -तीन तेरा घर बिखरै ।
37 - तीन बुलाया तेरा आया, भई राम की बाणी । राघो चेतन यूँ कहै, द्यो दाळ में पाणी ।।
38 -तीन सुहाळी, तेरा थाळी । बांटण वाळी सतर जणी ।।
39 -तीसरे सूखो आठवैं अकाळ - राजस्थान के लिए प्रयोग किया गया है ।
40 -तुरकणी कै रान्ध्योड़ा में के कसर ।
41 -तुरकणी रे कात्योडे में ही फिदकड़ो ।
42 -दियो लियो आडो आवै ।
43 -दूसरे की थाळी मँ घी ज्यादा दीखॅ।
44 -दूसरे की थाळी में सदा हि ज्यादा लाडू दीखैं ।
45 -धणी रो धन नीं देखणों, धणी रो मन देखणों ।
46 -धन्ना जाट का हरिसों हेत, बिना बीज के निपजँ खेत।
47 -नानी फंड करै, दोहितो दंड भरै ।
48 -नेपॅ की रुख खेड़ा'ई बतादें ।
49 -पावणां सूं पीढ़ी कोनी चालै, जवायाँ सूं खेती कोनी चालै ।
50 -पेड़ की जड धरती और लूगाई की जड़ रसोई ।
51 -पूत का पग पालणें में ही दीख जा हीं ।
52 -पत्थर का बाट - जत्ता भी तोलो, घाट-ही-घाट ।
53 -पीसो हाथ को, भाई साथ को ही काम आवै ।
54 -फूटेड़ो ढोल अर कूटेड़ो ढोली चीं नीं करै ।
55 -बड़ी रातां का बड़ा ही तड़का ।
56 -बहुआं हाथ चोर मरावै, चोर बहू का भाई ।
57 -बाड़ में मूत्यां कसौ बैर नीकळै ।
58 -बाड़ में हाथ घालण सैं तो काँटा ही लाग ।
59 -बातां रीझै बाणियूं, गीतां सै रजपूत । बामण रीझै लाडुवां, बाकळ रीझै भूत ।।
60 -बात में हुंकारो, फौज में नंगारो ।
61 -बाप ना मारी मांखी, बेटो तीरंदाज ।
62 -बाबो सगळां'नॅ लड़ॅ, बाबॅ'न कुण लड़ॅ ।
63 -बामण नै दियां पीछै गाय पराई हो जावै, परबारे हाथां में गयां पीछै रकम पराई हो जावै, पर्णीज्यां पीछै बेटी पराई हो जावै ।
64 -बायेड़ो उगै अर लिखेड़ो चूगै ।
65 -बावाड़ेड़ो पाहुणों भूत बिरौबर ।
66 -बिना बुलाया पावणा, घी घालूं कॅ तेल ।
67 -बिना रोऍ तो मा'ई बोबो कोनी दे ।
68 -बीन कॅ'ई लाळ पड़ँ जणा बराती के करँ ।
69 -बींद मरौ बींदणी मरौ, बांमण रै टक्कौ त्यार। ठाकर ग्या ठग रिया, रिया मुळक रा चोर॥
70 -बैठणो छाया मैं हुओ भलां कैर ही, रहणो भायां मैं हुओ भलां बैर ही ।
71 -भोजन में लाडू अर सगाँ में साडू ।
72 -भौंकँ जका काटँ कोनी ।
73 -मन का लाडु खाटा क्यों ।
74 -मन सूं रान्धेड़ो खाटो ई खीर लागै ।
75 -म्हानैं घडगी अ'र बेमाता बाड़ मैं बड़गी ।
76 -मँगो रोवे ऐक बार, सस्तो रोवे सो बार ।
77 -मन मीठो तो सै मीठा, मन खाटो तो सै खाटा ।
78 -मरद की कूब्बत राड़ में, लुगाई की कूब्बत रान्धणें में !
79 -मानो तो देव नहीं तो भींत को लेव।
80 -मिनख कमावै च्यार पहर, ब्याज कमावै आठ पहर ।
81 -मिनख बाण रो गोलौ ।
82 -मेवा तो बरसँता भला, होणी होवॅ सो होय ।
83 -मेह की रुख तो भदवड़ा'ई बता दें ।
84 -मुंडै सूं नीसरी बात, कमाण सूं नीसरयो तीर, अर परमात्मा री पोळ गयोड़ा पराण पाछा नीं बावडै । 85 -मोटो ब्याज मूल नै खावै ।
87 -राजपूती धोरां में रळगी, ऊपर चढ़ गई रेत ।
88 -राजा री आस करणी, पण आसंगो नीं कारणों ।
89 -रांड आग गाळ कोनी ।
90 -रांड कै मारयोड़ै की अर गाँव में फिरयोड़ै की दाद-फिराद कोनी ।
91 -राई का भाव रात ही गया ।
92 -राई बिना किसो रायतो ।
93 -राजा करै सो न्याव, पासो पड़ै सो डाव ।
94 -राजा जोगी अगन जळ, इण की उलटी रीत । डरता रहियो परसराम, ये थोडी पाळै प्रीत ।।
95 -राड़ को घर हांसी, रोग को घर खांसी ।
96 -राड़ सैं बड़ भली ।
97 -रात आगै उँवार कोनी ।
98 -रात च्यानणी, बात आंख्या देखी मानणी ।
99 -राबड़ी को नांव गुलसफ्फा ।
100 -राबड़ी बी कहै मन दांतां सै खावो ।
101 -राबड़ी में गुण होता तो ब्या में नां रान्धता ।
102 -राबड़ी में राख रांधै, चून पाटै पीसती । देखो रै या फ़ूड रांड, चालै पल्ला घींसती ।।
103 -रिण अर बैर कदैई जूनां नीं व्है ।
104 -रांड स्याणी हुवै पण कसम मरयां फेर ।
105 -रूप की रोवै करम की खावै ।
106रूपयो होवै रोकड़ी सोरो, आवै सांस, संपत होय तो घर भलो, नहीं भलो परदेस।
107 -रोता जां बै मरेडां की खबर ल्यावैं ।
108 -लालबही छप्पन रो पानो, बोहरो रोवै छानो-छानो ।
109 -सरलायो छूंदरो, बद्दां बंध्यो जाट । मदमाती गूजरी, तीनों वारां बाट ।।
110 -साबत रैसी सर तो घणाई बससीं घर।
111 -सात घर तो डाकण भी छोड दिया करै है।
112 -सावण भलो सूर'यो भादुड़ो पिरवाय, आसोजां मैं पछवा चाली गाडा भर भर ल्याव ।
113 -सासरौ सुख आसरौ, जे ढबै दिन चार । जे बसै दिन दस बीस, हाथ में खुरपी माथै भार ।।
114 -सासरौ सुख बासरौ, चार दिनां को आसरौ, जै रवे मास दो मास, देस्याँ खुरपी खुदास्याँ घास ।
115 -हाँसी-हाँसी में हो-ज्यासी खाँसी ।
116 -हिल्योडो चोर गुलगुला खाय !
117 -सौ बुद्धि री सांकली,दस बुद्धि री दडी,आच्छी म्हारी एक बुद्धि पाधरे मारग पड़ी!
118 -उठ बीन फेरा ले हे राम मौत दे!
119 -सेफां बाई राम-राम !
120 -गीतेड्या रो छेडो आयो जणे सेफां बाई ने तेडो आयो!
Saturday, April 19, 2008
क्या बात है....
तुमसा कोई दूसरा हुआ तो रब्ब से शिकायत होगी
एक तो झेला नही जाता, दूसरा आगया तो क्या हालत होगी
नाकाबिलों की क्या है, काबिल बदल रहें हैं
दरिया का क्या भरोसा, साहिल बदल रहे हैं
आँखें बदल के डाक्टर, बोले विधायकों से,
तुम दल बदल रहे हो, हम गुर्दा और दिल बदल रहे हैं...
सत्य अहिंसा दया धर्म से, अपना इतना नाता है, दीवारों पर लिख देते हैं, दीवाली पर पुत जाता है.
रोडवेज की बसों में, छोटे-छोटे काले अक्षरों में लिखा होता है - "धुम्रपान मत कीजिए" उन्ही बसों के बाहर रंगीन विज्ञापन होता है - "शंकर छाप बीडी पीजिए"
अस्पताल
डाक्टर अपने घर दवा हो गई हवा
मरीज बेहाल.............. अस्पताल
हड़ताल
लोगो ने पूछा तो कारण बतलाया!
मेरा तो विरोध और समर्थन मिला जुला है
बंद समझो तो बंद खुला समझो तो खुला है
अमृत
दोस्त मेरे देश की गरीब जनता ने आज तक अमृत नही पिया फ़िर भी वो अमर है
सब्जी वाला
आप और खरीदेगे सब्जीयाँ - अपनी शक्ल देखी है मियाँ
करेले एक रूपये के पाँच - चहरा बिगाड़ देगी आलुओं की आँच
पालक पच्चास पैसे के पाँच पत्ती - गोभी दो आने रत्ती
कठहल का भाव सुनोगे तो कलेजा हिल जायेगा
ये नेताओं का चरित्र नही जो चारआन्ने पाव मिल जायेगा..................
खींच ताँण.....सा,
खींच ताण सा - खींच ताण सा.................................
इक चुम्बक सत्ता रे चिपक गीयो - छोटकिया चुम्बक मिल एको कियो-2
हाँ भेली हूँ मिली भुं मैं भुं - वै खोश खुर्सी पर कब्जो कियो
सत्ता रे खातर लोभी लड़पड्या-२ झपटा झपटी मैं कुर्सी डोल्गी
मौको पा हथल पटक कर उठी-२ आपसरी तूँ ताँ मैं म्याऊं बोल्गी
जीवतारा गुदडा पुग्या मुँसांण सा.............. खींच ताण सा - खींच ताण सा
तन तो मिल्या पण मन अंतारा ऊपर सु दिखे घणा सांतरा
चोले री खौली मैं फंण सांप रा किरडा गोइल्डा घणा भाँतरा
तन बदलू दल बदलू रंग बदलू रे-२ मतलबी पुरा आपो आपरा
आँरो भरोसो करे सोई मरे साथी न सिरी सगे बापरा
खिचडे री हांडकी आई उफाँण सा........ ...खींच ताण सा - खींच ताण सा
आँणो न जाँणो मँगाणो नही-२ लेणों न देणो चुकाणो नही
जोखो न धोखो नीं संकाँ फिरो बोतल भर पडसी लूकाँणो नही
ख़ुद ही हो मधुशाला प्याला भरो-२ घर-घर पड़ेलो अब जाणो नही
बासी न बुसी है गरमा गरम-२ तुरतां तुरंत लो शरमाणो नही
आप्रो ही आप पियो छाण-छाण सा......... खींच ताण सा - खींच ताण सा
मोडिया-
मौको लाग्याँ मोडिया चेली सुं चिप जाय!
माँ जाई कहे मोडिया करे कमाई किर
बाई कहे जिण बहन रा बणे जवांई बीर!
मोडा द्रगड़ मालिया गंवार भोगे गाल
भोगे सुंदर भामणि मुफ्त अरोगे माल!
साँडाँ ज्यूँ ऐ सादडा भाँडाँ ज्यूँ करे भेष
राँडाँ मैं रोता फिरे लाज न आवे लेस!
बांम बांम बकता कहे दाम दाम चित देत
गाँव गाँव ताके गंडक राम नाम मैं रेत!
मिन्दर सहेल्याँ बिच मैं हँस हँस मारे हौड
चेली सुं चुके नही मौकों लाग्याँ मौड!
कोड
जो तूं चाहे धन और माया दादू पंथी होज्या भाया!
जो तूं चाहे इन्द्रियों का भोग जा खेडापे मैं ले ले जोग!
जो तूं चाहे निन्द्रा का कोड सिन्थल का होज्या मौड!
जो तूं चाहे भोजन खाया राम स्नेहीं होज्या भाया!
नगद........नारायण,
भज नगद नारायण - नगद नारायण भाई रे नगद नारायण - भाई रे नगद नारायण..........
मरज्यावे बिन गोली लाग्या भणकार पड़न्ता काना मैं
रग रग मैं रगत उफाण करे गर्मी आवे ज्यूं इंजण मैं
मानो रे साची सम्झावण बाकी से थोथी रामायण.......भज नगद नारायण
बिन थारे उदघाटण मैं गरमी नहीं आवे भाषण मैं
थारे बिन रोंला शासण मैं फाका पड़ज्यावे राषण मैं
मिट ज्यावे सगळी कलडावण जद सपने मैं लागे अल्डावण.........भज नगद नारायण
है नगद नारायण अंटी मैं नॉ खून माफ़ गारंटी मैं
ज्या निकल साबतो घट्टी मैं दागो नहीं लगे भट्टी मैं
अवतारी ओ कलजुग तारण कर साँझ सवेरे गुण गायण..........भज नगद नारायण
लुगाई-रो-कागद
घणे हेत सूँ प्रीत प्रेम सूँ आपरे चरण लकड़ मैं प्रेम लाडली रा शीश झुकार पग पकड़ मानना!
हे साहब जी,
गौत री मौत,आटे री लौथ, जागती जौत, थौथ ही थौथ,सुहाग री महंदी, विधवा रा श्रंगार, गले रा हार, छाती रा भार,मायली मार,लुगडी रा तार, मुनकी रा भा जी काल रा छोरा,खेड़ापे रा स्यामी म्हारा जामी!
दुखती आँख मैं गीड ज्यूँ रात दिन आपरी ओलूं घंनी आवे नींद नी आवे है!
हे भरतार जी,
अजकाले तो म्हारे उन्धी ही उन्धी जचे है जाणु भाटेऊ सासु सुसरे रो नाक भांग दूँ, करम फोड़ दूँ, टांग तोड़ दूँ पण इसो विचार पल दो पल ही रेवे है आदत पड़गी तो आपने ही खतरों है!
हे प्रीतम जी,
अचानक कालजे मैं धपड़को सो उठ ज्यावे है छाती मैं लाय सीक लाग ज्यावे आंख्याँ मैं तरड़- तरड़ आंसू आवे जाणे सावन झड़ लगी है एकदम मन मैं इसी जचे जाणु आप संसार मैं कोनी!
बिजली कड़के, छाती धडके, आंख्या फडके जणे मन मार घर मैं जार उन्धी पडके सो ज्याऊ थाने रोउ!अशुभ समाचार सूँ डरती डाकिये ने देखर आडो ढक दूँ कांइठा आपरे मरण रो कागज पत्र पकडाइदे!
हे परमेश्वर जी,
कागज़ बांचता पाण बेगा आज्यो जीव नी लगे सुखर उबालियोड़ी सांगरी सी हुगी हाथां रा कडूल्या आंगली मैं नी आवे नखां मैं ही फस ज्यावे धान री तो बास आवे- टुकडों ही नी भावे कितोई खाऊ धापुं ही कोनी!
हे धणी जी,
कबूतर - कबूतरी ने गुटर-गु गुटर-गु करता देख मने थांरी ओलूं घणी आई धणी दुःख पाई रोई-सोई पण नींद नी आई थे म्हारे खने होता म्हे थारे ओली दोली फिरती गुटर-गु गुटर-गु करती थे म्हारे चुन्चां मरता म्हे थांरे चुन्चां मारती
हे चरनदास जी,
सारी रात अंख्या मैं बात नी पड्यो, जागी भागी रसोई मैं गई सेर एक आते रो सिरों बणार खायो जणे जार आँख लगी दूजे दिन तीन बज्याँ जगी, जगी कांइ जगायदी गई मरी खाई पाडोसन आई बोली थारा सासु-सुसरा भूत बणग्या जापतो करा!
पत्तो पल्टियो आगे पढियो इं भांत रा रोजीना खोटा खोटा सपना आवे, ठाला भुला मने डरावे, औ सपनो काल झांझरके आयो! बेगा आज्यो मोड़ो मत करज्यो जे थे नी आओला सपनो साचो हुज्यवेला टाबर रुलज्यावेला!!
आप रे प्राणा री प्यासी
पताल फुर्र ............
कैसे कैसे उत्पाद
एक आदमी चिल्ला रहा था
कुछ बेचा जा रहा था
आवाज कुछ इस तरह आई
शरीर में स्फुर्ति न होने से परेशान हो भाई
थकान से टूटता है बदन
काम करने में नहीं लगता है मन
खुद से ही झुंझलाए हो
या किसी से लड़कर आए हो
तो हमारे पास है ये दवा
सभी परेशानियां कर देती है हवा
मैंने भीड़ को हटाया
सही जगह पर आया
मैंने कहा इतनी कीमती चीज
कहीं मंहगी तो नहीं है
वो बोला आपने भी ये क्या बात कही है
इतने सारे गुण सिर्फ दो रुपए में लीजिए
भाई साब पहलवान छाप बीड़ी पीजिए
बात इतनी सी थी श्रीमान
प्रचार पहलवान छाप बीडी
मगर हमारे मुंह से निकला बीडी छाप पहलवान
हम तो गलती से ग़लत शब्दों के भाव खा गाये
मगर हमारे मोहल्ले के पहलवान सुनते ही ताव मैं आ गये
एक जोरदार झापड़ हमारे गाल पर जड़ दिया
हम गांधीजी के चेले ठहरे...दूसरा गाल भी आगे कर दिया
मगर उसका अहिंसा मैं विश्वास नही था उसने दूसरे पर भी धर दिया
और बोला...क्यों बै दो चार और खायेगा
बता बेटे तीसरा गाल कहाँ से लाएगा
हमने कहा गांधीजी की जीवनी यहीं तक पढी है
अब ऐसी स्तिथी मैं क्या करना चाहिए
मैं आगे पढ़ कर आता हूँ आप यहीं रुक जाइए
पन्द्रह मिनट बाद हम बाहर आए तो अलग रोल था
बांये हाथ मैं मूंछ और दांये हाथ मैं पिस्तौल था
देखते ही घबराकर पहलवान बोला.....भ..भ..भ.....भाई साब
गांधी जी के पक्के चेले थे आप....
हमने कहा था मगर पन्द्रह मिनट पहले तक था
बस आपसे ही सबक लिया है हमने पाला बदल लिया है
अब गांधीजी को छोड़ चन्द्रशेखर की पार्टी को चुन लिया है
पहलवान तो ऐसा भागा.....के......पीछे मुडके ही नही झाँका..
राजस्थानी की मशहूर कहावते -1
राजस्थानी ऑखाणा -1
1 - अकल बिना ऊंट उभाणा फिरैं ।
2 -अक्खा रोहण बायरी, राखी सरबन न होय । पो ही मूल न होय तो, म्ही दूलन्ती जोय ।
3 -अगम् बुद्धी बाणियो पिच्छम् बुद्धी जाट । तुर्त बुद्धी तुरकड़ो, बामण सपनपाट ।
4 -अग्रे अग्रे ब्राह्मणा, नदी नाला बरजन्ते ।
5 -अगस्त ऊगा, मेह पूगा ।
6 -अटक्यो बोरो उधार दे ।
7 -अठे किसा काचर खाय है !
8 -अदपढ़ी विद्या धुवै चिन्त्या धुवे सारीर !
9 -अनहोणी होणी नहीं, होणी होय सो होय !
10 -अभागियो टाबर त्युंहार नै रूसै ।
11 -अम्बर कै थेगळी 1कोनी लागै ।
12 -अम्मर को तारो हाथ सै कोनी टूटै ।
13 -अम्मर पीळो में सीळो ।
14 -अमरो तो मैं मरतो देख्यो, भाजत देख्यो सूरो । चोधर तो मैं खुसती देखी, लाछ बुहारी कूडो ।
15 -हूँ पाछो भलो, नांव भलो लैटूरो !
16 -अय्याँ ही रांडा रोळा करसी अर अय्याँ ही पावणा जिमबो करसी ।
17 -अरड़ावतां ऊँट लदै ।
18 -अरजन जसा ही फरजन ।
19 -अल्ला अल्ला खैर सल्ला ।
20 -असलेखा बूठां, बैदां घरे बधावणा । अर्थ - असलेखा नक्षत्र में वर्षा हो तो बैद-हकीमों के घर बधाई बँटे, मतलब रोग बढ़ते हैं ।
21असवार तो को थी ना पण ठाडां करदी - किस्सा यों है कि एक औरत को एक डाकू जबरदस्ती उठा कर ले जा रहा था. ऊँट तेजी से दोड़ रहा था. रास्ते में उस औरत का एक परिचित मिल गया. उसने पूछा, 'आरी तू ऐसी सवार कब से हो गयी जो ऊँट को इतने जोरों से भगा रही है ?' तब उसने उत्तर में ऊपर की कहावत कही जिसका अर्थ है कि मैं सवार तो नही थी, जबर्दस्तों ने मुझे सवार बना दिया ।
22 -असाई म्हे असाई म्हारा सगा, बां कै टोपी न म्हारे झगा ।
23 -असी रातां का अस्सा ही तड़का ।
24 -असो भगवान्यू भोळो कोनी जको भूखो भैसां में जाय ।
25 -अस्सी बरस पूरा हुया तो भी मन फेरां में रह्या ।
26 -आंध्यां की माखी राम उडावै ।
27 -आलकसण ने रोट्याँ रो साग ।
28-आठ फिरंगी नो गोरा लड़ें जाट के दो छोरा ।
29 -आसोजां का पड्या तावडा जोगी बणग्या जाट ।
30 -उधार दियोड़ो आवै घर लेखै, नींतर हर लेखै ।
31 -ऊन'रै को जायेड़ो बिल ही खोदै ।
32 -अछूकाळ कादा में पीवै ।
33 -आदर खादर बाजे बाव , झूंपङ पङिया झोला खाय ।
34 -आँख कान को च्यार आंगळ को फरक है ।
35 -आंख गयी संसार गयो, कान गया हँकार गयो ।
36 -आँख फड़कै दहणी, लात घमूका सहणी ।
37 -आँख फड़कै बांई, के बीर मिलै के सांई ।
38-आँख फुड़ाई मूंड मुन्डायो, घर को फेरयो द्वार । दोन्यू बोई रै बूबना, आदेश न जुहार ।
39 -आँख मीच्यां अंधेरो होय ।
40 -आंख्याँ देखी परसराम, कदे न झूठी होय ।
41 -आंख्याँ में गीड पड़ै, नांव मिरगानैणी ।
42 -आंख्याँ सै आन्धो, नांव नैनसुख ।
43 -आंगल्याँ सूं नूं परै कोनी हुवे ।
44 -आंधा की गफ्फी, बहरा को बटको । राम छुटावै तो छूटै नहीं सिर ही पटको ।
45 -आंधा सुसरा सैं क्यांकी लाज ।
46 -आंधी आई ही कोनी, सूंसाट पैली ही माचगो ।
47 -आंधी भैंस बरू में चरै ।
48 -आई ही छाय ने, घर की धिराणी बन बैठी ।
49-आक को कीड़ो आक में, ढाक को कीड़ो ढाक में ।
50 -क ख ग घ ड़, काको खोटा क्यों घडै ।
51 -कपूत हूँ नपूत भलो ।
52 -कर रै बेटा फाटको, खड्यो पी दूध को बाटको ।
53 -करम लिखा कंकर तो के करै शिव शंकर ।
54 -करमहीण किसनियो, जान कठै सूं जाय । करमां लिखी खीचड़ी, घी कठै सूं खाय ।
55-करमहीण खेती करे, के हळ भागे के बळद मरे ।
56 -काणी के ब्याह में सौ टेड ।
57 -काम का ना काज का ... ढाई मण अनाज का ।
58 -काळी बहू अर जल्योड़ो दूध पीढ्याँ ताईं लजावै ।
59 -काळी हांडी रै कनै बैठयाँ काळस न सरी काट तो लाग्यां सरै ।
60 -कौड़ी बिन कीमत नहीं सगा नॅ राखै साथ, हुवै जे नामों (रूपया) हाथ मैं बैरी बूझै बात।
61 -खरी कमाई घणी कमाई ।
62 -खेती करै नॅ बिणजी जाय, विद्या कै बल बैठ्यो खाय ।
63 -गरज दीवानी गूजरी नूंत जिमावै खीर, गरज मिटी गूजरी नटी, छाछ नही रे बीर ।
64 -गरजवान री अकल जाय, दरदवान री शक्कल जाय ।
65 -गरज सरी अर वैद बैरी ।
66-गरीब री हाय, जड़ामूल सूं जाय ।
67 -गादड़ै की मोत आवै जणा गांव कानी भागै।
68 -गाँवहाला कूटै तो माईतां कनै जावै, माईत कूटै तो कठै जावै ।
69 -गोदी मैं छोरो गळी मैं हेरै ।
70 -घणी सुधी छिपकली चुग चुग जिनावर खाय ।
71 -घणूं खाय ज्यों घणों मरै ।
72-घणों सयाणों कागलो दे गोबर में चांच ।
73 -घर का टाबर काणा भी सोवणा ।
74 -घर की खांड किरकिरी लागै, गुड चोरी को मीठो ।
75 -घर की डाकन घर का नै ही खाय ।
76 -घर को जोगी जोगणूं आन गाँव को सिद्ध ।
77 -घर नै खोवाई साळो ।
78 -घर बळतो कोनी दीखै, डूंगर बळतो दीखै !
79 -घी सुधारै खीचड़ी, और बड्डी बहू का नाम ।
80 -घैरगडी सासू छोटी भू बडी ।
81 - च्यार चोर चौरासी बाणिया, बाणिया बापड़ा के करँ ।
82 - चढ्योड़ो जाट तूम्बो ई चबा जावै ।
83 -चोरी जैड़ो रुजगार नीं, जे पड़ती व्है मार नीं ।
84 - छड़ी पड़ै छमाछम, विद्या आवै धमाधम।
85 -ज्यादा स्याणु कागलो गू मैं चांच दे !
86 - जाओ लाख रैवो साख, गई साख तो बची राख ।
87 - जंगल जाट न छोड़िये,हाटां बीच किराड़। रांगड़ कदे न छोड़िये,ये हरदम करे बिगाड़।।
88 - जमीन ऍर जोरु जोर की नहीं तो कोई और की।
89 - जांटी चढे जको सीरणी बाँट - अर्थ: जो समी के पेड़ पर चढ़ता है, वही खतरे के निवारण हेतू देवता का प्रसाद बोलता है ।
90 -जाट की बेटी और काकोजी की सूं - अर्थ: छोटा भी जब ज्यादा नजाकत दिखाने लगता है तब प्रयोग किया जाता है ।
91 - जाट जंवाई भाणजो, रेवारी सुनार । ऐता नहीं है आपणा, कर देखो उपकार ।
92 - जाट जंवाई भाणजा, रैबारी सुनार । कदे न होसी आपणा, कर देखो व्योहार ।
93 - जाट जठे ठाठ ।
94 - जाट जडूलै मारिये, कागलिये ने आळै । मोठ बगर में पाडि़ये, चोदू हो सो बाळै - अर्थ:जाट जब तक वयस्क नहीं हो जाता, कौवा जब तक उड़ना नहीं सीख लेता तब तक ही ये वश में आते हैं । मोठों पर जब तक बगर आया रहता है तब तक ही उपाड़ना ठीक है ।
95 -जाट कहे सुण जाटणी, इसी ना कदे होय । चाकी पीसे ठाकरां, भांडा मांजै जोय ।
96 - जाट कहे सुण जाटणी, इणी गाँव में रणों, ऊंट बिलाई लेगई हांजी हांजी कहणों ।
97 - जाट की छोरी र' फलकै बिना दोरी ।
98 -जाट को के जजमान, राबडी को के पकवान ।
99 - जाट गंगाजी नहा आयो के ? कह, खुदाई कुण है ।
100 - जाट जाट तेरो पेट बांको, कह, मैं ई मैं दो रोटी अलजा ल्यूंगो ।
101 -जाट न जायो गुण करै, चणैं न मानी बाह, चन्नण बिड़ो कटायकी, अब क्यों रोव बराह ।
102 - जाट बलवान जय भगवान ।
103 -जाट डूबै धोळी धार, बानियों डूबै काळी धार ।
104 -जाट मरा जब जानिये जब चालिसा होय ।
105 -जाट रे जाट ! तेरे सिर पर खाट, कह, मियाँ रे मियाँ ! तेरे सिर पर कोल्हू, कह, तुक तो मिली ना, कह, बोझ्याँ तो मरैगा ।
106 -जीम्या जिनै जीमांणा ई पडे ।
107 -जीमण अर झगड़ौ, पराये घरां आछो लागै ।
108 - जीमाणों सोरो जीमाणो दोरौ !
109 -जीम्यां छोडै पांवणौ, मरयाँ छोडै ब्याज ।
110 -जैं करी सरम, बैंका फूट्या करम ।
111 - जो गुड़ सैं मरै बी'नै जहर की के जरुरत।
112 - जाट और घोयरा तावडॆ मॆ ही निकला करे।
113 -टका दाई ले गी अर कून्डो फोड़गी ।
114 -टकै की हांडी फूटी, गंडक की जात पिछाणी । टपकन लागी टापरी, भीजण लागी खाट ।
115 -टको टूंसी एक न यार, तोरण मारण होग्यो त्यार ।
116 -ठाकर री गोळी, गांवरी सिरमोळी ।
117 -ठाकरण भागो किसाक ? कह, गैल की मार जाणिये ।
118 -थाडै को डोको डांग नै फाड़ै ।
119 -थाडो मारै अर रोवण भी कोन्या दे ।
120 -ठाली ठुकराणी को पेई में हाथ जाय ।
121-ठाली बैठी डोकरी, घर में घाल्यो घोड़ो ।




