Saturday, April 19, 2008

खींच ताँण.....सा,

खींच ताण सा - खींच ताण सा-2 कागला ई हँस री उडे उड़ान सा.....
खींच ताण सा - खींच ताण सा.................................
इक चुम्बक सत्ता रे चिपक गीयो - छोटकिया चुम्बक मिल एको कियो-2
हाँ भेली हूँ मिली भुं मैं भुं - वै खोश खुर्सी पर कब्जो कियो
सत्ता रे खातर लोभी लड़पड्या-२ झपटा झपटी मैं कुर्सी डोल्गी
मौको पा हथल पटक कर उठी-२ आपसरी तूँ ताँ मैं म्याऊं बोल्गी
जीवतारा गुदडा पुग्या मुँसांण सा.............. खींच ताण सा - खींच ताण सा

तन तो मिल्या पण मन अंतारा ऊपर सु दिखे घणा सांतरा
चोले री खौली मैं फंण सांप रा किरडा गोइल्डा घणा भाँतरा
तन बदलू दल बदलू रंग बदलू रे-२ मतलबी पुरा आपो आपरा
आँरो भरोसो करे सोई मरे साथी न सिरी सगे बापरा
खिचडे री हांडकी आई उफाँण सा........ ...खींच ताण सा - खींच ताण सा

आँणो न जाँणो मँगाणो नही-२ लेणों न देणो चुकाणो नही
जोखो न धोखो नीं संकाँ फिरो बोतल भर पडसी लूकाँणो नही
ख़ुद ही हो मधुशाला प्याला भरो-२ घर-घर पड़ेलो अब जाणो नही
बासी न बुसी है गरमा गरम-२ तुरतां तुरंत लो शरमाणो नही
आप्रो ही आप पियो छाण-छाण सा......... खींच ताण सा - खींच ताण सा

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