Saturday, April 26, 2008

रूप

मैं तुझ को अगर एक फूल कहूँ तेरे रुतबे की तौहीन है ये
तेरा रूप हमेशा कायम है दम भर के लिए रंगीन है ये !....

ये आँख अगर जो उठ जाए हर एक सितारा सजदा करे
आ जाये कहीं होठो पे हसीं बिजली भी तड़फ कर आह: भरे....

ये जुल्फ अगर जो खुल जाए रातो की जवानी शरमाये
रफ़्तार का आलम क्या कहिये बहता हुआ दरिया थम जाए....

दिन रात महकना कलियों ने अदा तुमसे ही पायी
ये चाँद जो घटता बढ़ता है दरअसल है तेरी अंगडाई....

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