मैं तुझ को अगर एक फूल कहूँ तेरे रुतबे की तौहीन है ये
तेरा रूप हमेशा कायम है दम भर के लिए रंगीन है ये !....
ये आँख अगर जो उठ जाए हर एक सितारा सजदा करे
आ जाये कहीं होठो पे हसीं बिजली भी तड़फ कर आह: भरे....
ये जुल्फ अगर जो खुल जाए रातो की जवानी शरमाये
रफ़्तार का आलम क्या कहिये बहता हुआ दरिया थम जाए....
दिन रात महकना कलियों ने अदा तुमसे ही पायी
ये चाँद जो घटता बढ़ता है दरअसल है तेरी अंगडाई....
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