Monday, April 21, 2008

ऐसा भी होता है!


नाजो से पले काँटों पे चले ऐसा भी जहाँ मै होता है!
तकदीर के जालिम हाथो मै मन खून के आंसू रोता है!!

नित दिन मै चरागाह रहता था ख़ाक उड़ती है उन ऐवानो मै!
मखमल पे न जो रखते थे कदम फिरते है रेगिस्तानों मै!!

रहने का ठिकाना कोई नही रुकने का बहाना कोई नही!
इस हाल मै काम आने वाला अपना बैगाना कोई नही!!

दुनिया मै किसी को भी अपनी किस्मत का लिखा मालूम नही!
सामान है लाखो बरसों का पर कल का पता मालूम नही!!

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