राजस्थानी ऑखाणा -2
1 -ठालै बैठ्याँ सूँ बेगार भली ।
2 -ठिकाणे ठाकुर पूजीजै ।
3 -ठिकाणै सैं ई ठाकर बाजै ।
4 -ठोकर खार हुन्स्यार होय ।
5 -डाकण बेटा ले क दे ।
6 -डाकणां के ब्यावां में नूतारां का गटका ।
7डाकणां सै गाँव का नळा के छाना है ।
8 -दिग्मरां के गाँव में धोबी को के काम ।
9 -डूंगर चढ़तो पांगळो, सीस अणीतो भार ।
10 -डूंगर बळती दिखै, पगां बळती कोनी दिखै ।
11 -डूबतो सिंवाळां न हाथ घालै ।
12 -डेड घड़ो'र डीडवाणू पाऊँ ।
13 -ढक्योड़ो मत उघाड़ और भू घर तेरो ई है ।
14 -ढबां खेती,ढबां न्याव ।
15 -ढल्यो घोटी, हुयो माटी ।
16 -ढेढ़ को मन ल्याह्वड़ै में ही ।
17 -ढेढ़ नै सुरग में भी बेगार ।
18 -ढेढ़ रे साथे धाप'र जीमो भांवै आंगळी भर कर चाखो ।
19 -ढेढ़ रो पल्लो लगावो, भांवै बाथे पड़ो ।
20 -ढेढ़ां की दुर्सीस सूं दाव थोड़ा ई मरै ।
21 -ढेढणी और रावळै जा आई ।
22 -ढोली गावतो अर टाबर रोवतो चोखो लागै ।
23 -तंगी में कुण संगी ?
24 -तरवार को घाव भरज्या बात को कोनी भरै ।
25 -तवै की काची नै, सासरै की भाजी नै कठैई ठोड़ कोनी ।
26 -तवै चढ़ै नै धाड़ खाय ।
27 -ताता पाणी सैं कसी बाड़ बळै ।
28 -तातो खावै छायाँ सोवै, बैंको बैद पिछोकड़ रोवै ।
29 -ताळी लाग्यां ताळो खुलै ।
30 -तावळो सो बावळो ।
31 -तिरिया चरित न जाणे कोय, खसम मार के सत्ती होय ।
32 -तीज त्युंहारां बावड़ी, ले डूबी गणगौर ।
33 -तीजां पाछै तीजड़ी, होळी पाछै ढूंढ, फेरां पाछै चुनड़ी, मार खसम कै मूंड ।
34 -तीतर कै मूंडै कुसळ है ।
35 -तीतर पंखी बादळी, विधवा काजळ रेख । बा बरसे बा घर करै, ई में मीन न मेख ।।
36 -तीन तेरा घर बिखरै ।
37 - तीन बुलाया तेरा आया, भई राम की बाणी । राघो चेतन यूँ कहै, द्यो दाळ में पाणी ।।
38 -तीन सुहाळी, तेरा थाळी । बांटण वाळी सतर जणी ।।
39 -तीसरे सूखो आठवैं अकाळ - राजस्थान के लिए प्रयोग किया गया है ।
40 -तुरकणी कै रान्ध्योड़ा में के कसर ।
41 -तुरकणी रे कात्योडे में ही फिदकड़ो ।
42 -दियो लियो आडो आवै ।
43 -दूसरे की थाळी मँ घी ज्यादा दीखॅ।
44 -दूसरे की थाळी में सदा हि ज्यादा लाडू दीखैं ।
45 -धणी रो धन नीं देखणों, धणी रो मन देखणों ।
46 -धन्ना जाट का हरिसों हेत, बिना बीज के निपजँ खेत।
47 -नानी फंड करै, दोहितो दंड भरै ।
48 -नेपॅ की रुख खेड़ा'ई बतादें ।
49 -पावणां सूं पीढ़ी कोनी चालै, जवायाँ सूं खेती कोनी चालै ।
50 -पेड़ की जड धरती और लूगाई की जड़ रसोई ।
51 -पूत का पग पालणें में ही दीख जा हीं ।
52 -पत्थर का बाट - जत्ता भी तोलो, घाट-ही-घाट ।
53 -पीसो हाथ को, भाई साथ को ही काम आवै ।
54 -फूटेड़ो ढोल अर कूटेड़ो ढोली चीं नीं करै ।
55 -बड़ी रातां का बड़ा ही तड़का ।
56 -बहुआं हाथ चोर मरावै, चोर बहू का भाई ।
57 -बाड़ में मूत्यां कसौ बैर नीकळै ।
58 -बाड़ में हाथ घालण सैं तो काँटा ही लाग ।
59 -बातां रीझै बाणियूं, गीतां सै रजपूत । बामण रीझै लाडुवां, बाकळ रीझै भूत ।।
60 -बात में हुंकारो, फौज में नंगारो ।
61 -बाप ना मारी मांखी, बेटो तीरंदाज ।
62 -बाबो सगळां'नॅ लड़ॅ, बाबॅ'न कुण लड़ॅ ।
63 -बामण नै दियां पीछै गाय पराई हो जावै, परबारे हाथां में गयां पीछै रकम पराई हो जावै, पर्णीज्यां पीछै बेटी पराई हो जावै ।
64 -बायेड़ो उगै अर लिखेड़ो चूगै ।
65 -बावाड़ेड़ो पाहुणों भूत बिरौबर ।
66 -बिना बुलाया पावणा, घी घालूं कॅ तेल ।
67 -बिना रोऍ तो मा'ई बोबो कोनी दे ।
68 -बीन कॅ'ई लाळ पड़ँ जणा बराती के करँ ।
69 -बींद मरौ बींदणी मरौ, बांमण रै टक्कौ त्यार। ठाकर ग्या ठग रिया, रिया मुळक रा चोर॥
70 -बैठणो छाया मैं हुओ भलां कैर ही, रहणो भायां मैं हुओ भलां बैर ही ।
71 -भोजन में लाडू अर सगाँ में साडू ।
72 -भौंकँ जका काटँ कोनी ।
73 -मन का लाडु खाटा क्यों ।
74 -मन सूं रान्धेड़ो खाटो ई खीर लागै ।
75 -म्हानैं घडगी अ'र बेमाता बाड़ मैं बड़गी ।
76 -मँगो रोवे ऐक बार, सस्तो रोवे सो बार ।
77 -मन मीठो तो सै मीठा, मन खाटो तो सै खाटा ।
78 -मरद की कूब्बत राड़ में, लुगाई की कूब्बत रान्धणें में !
79 -मानो तो देव नहीं तो भींत को लेव।
80 -मिनख कमावै च्यार पहर, ब्याज कमावै आठ पहर ।
81 -मिनख बाण रो गोलौ ।
82 -मेवा तो बरसँता भला, होणी होवॅ सो होय ।
83 -मेह की रुख तो भदवड़ा'ई बता दें ।
84 -मुंडै सूं नीसरी बात, कमाण सूं नीसरयो तीर, अर परमात्मा री पोळ गयोड़ा पराण पाछा नीं बावडै । 85 -मोटो ब्याज मूल नै खावै ।
87 -राजपूती धोरां में रळगी, ऊपर चढ़ गई रेत ।
88 -राजा री आस करणी, पण आसंगो नीं कारणों ।
89 -रांड आग गाळ कोनी ।
90 -रांड कै मारयोड़ै की अर गाँव में फिरयोड़ै की दाद-फिराद कोनी ।
91 -राई का भाव रात ही गया ।
92 -राई बिना किसो रायतो ।
93 -राजा करै सो न्याव, पासो पड़ै सो डाव ।
94 -राजा जोगी अगन जळ, इण की उलटी रीत । डरता रहियो परसराम, ये थोडी पाळै प्रीत ।।
95 -राड़ को घर हांसी, रोग को घर खांसी ।
96 -राड़ सैं बड़ भली ।
97 -रात आगै उँवार कोनी ।
98 -रात च्यानणी, बात आंख्या देखी मानणी ।
99 -राबड़ी को नांव गुलसफ्फा ।
100 -राबड़ी बी कहै मन दांतां सै खावो ।
101 -राबड़ी में गुण होता तो ब्या में नां रान्धता ।
102 -राबड़ी में राख रांधै, चून पाटै पीसती । देखो रै या फ़ूड रांड, चालै पल्ला घींसती ।।
103 -रिण अर बैर कदैई जूनां नीं व्है ।
104 -रांड स्याणी हुवै पण कसम मरयां फेर ।
105 -रूप की रोवै करम की खावै ।
106रूपयो होवै रोकड़ी सोरो, आवै सांस, संपत होय तो घर भलो, नहीं भलो परदेस।
107 -रोता जां बै मरेडां की खबर ल्यावैं ।
108 -लालबही छप्पन रो पानो, बोहरो रोवै छानो-छानो ।
109 -सरलायो छूंदरो, बद्दां बंध्यो जाट । मदमाती गूजरी, तीनों वारां बाट ।।
110 -साबत रैसी सर तो घणाई बससीं घर।
111 -सात घर तो डाकण भी छोड दिया करै है।
112 -सावण भलो सूर'यो भादुड़ो पिरवाय, आसोजां मैं पछवा चाली गाडा भर भर ल्याव ।
113 -सासरौ सुख आसरौ, जे ढबै दिन चार । जे बसै दिन दस बीस, हाथ में खुरपी माथै भार ।।
114 -सासरौ सुख बासरौ, चार दिनां को आसरौ, जै रवे मास दो मास, देस्याँ खुरपी खुदास्याँ घास ।
115 -हाँसी-हाँसी में हो-ज्यासी खाँसी ।
116 -हिल्योडो चोर गुलगुला खाय !
117 -सौ बुद्धि री सांकली,दस बुद्धि री दडी,आच्छी म्हारी एक बुद्धि पाधरे मारग पड़ी!
118 -उठ बीन फेरा ले हे राम मौत दे!
119 -सेफां बाई राम-राम !
120 -गीतेड्या रो छेडो आयो जणे सेफां बाई ने तेडो आयो!
1 comment:
थां को घणो घणो उपकार, ज्ये ये क्हावताँ म्हाँके ताईँ पढ़बा नें मली। याँ को हिन्दी में अरथ भी कर देता तो और भी उपकार होतो।
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