Sunday, April 20, 2008

राजस्थानी की मशहूर कहावते -2

राजस्थानी ऑखाणा -2

1 -ठालै बैठ्याँ सूँ बेगार भली ।

2 -ठिकाणे ठाकुर पूजीजै ।

3 -ठिकाणै सैं ई ठाकर बाजै ।

4 -ठोकर खार हुन्स्यार होय ।

5 -डाकण बेटा ले क दे ।

6 -डाकणां के ब्यावां में नूतारां का गटका ।

7डाकणां सै गाँव का नळा के छाना है ।

8 -दिग्मरां के गाँव में धोबी को के काम ।

9 -डूंगर चढ़तो पांगळो, सीस अणीतो भार ।

10 -डूंगर बळती दिखै, पगां बळती कोनी दिखै ।

11 -डूबतो सिंवाळां न हाथ घालै ।

12 -डेड घड़ो'र डीडवाणू पाऊँ ।

13 -ढक्योड़ो मत उघाड़ और भू घर तेरो ई है ।

14 -ढबां खेती,ढबां न्याव ।

15 -ढल्यो घोटी, हुयो माटी ।

16 -ढेढ़ को मन ल्याह्वड़ै में ही ।

17 -ढेढ़ नै सुरग में भी बेगार ।

18 -ढेढ़ रे साथे धाप'र जीमो भांवै आंगळी भर कर चाखो ।

19 -ढेढ़ रो पल्लो लगावो, भांवै बाथे पड़ो ।

20 -ढेढ़ां की दुर्सीस सूं दाव थोड़ा ई मरै ।

21 -ढेढणी और रावळै जा आई ।

22 -ढोली गावतो अर टाबर रोवतो चोखो लागै ।

23 -तंगी में कुण संगी ?

24 -तरवार को घाव भरज्या बात को कोनी भरै ।

25 -तवै की काची नै, सासरै की भाजी नै कठैई ठोड़ कोनी ।

26 -तवै चढ़ै नै धाड़ खाय ।

27 -ताता पाणी सैं कसी बाड़ बळै ।

28 -तातो खावै छायाँ सोवै, बैंको बैद पिछोकड़ रोवै ।

29 -ताळी लाग्यां ताळो खुलै ।

30 -तावळो सो बावळो ।

31 -तिरिया चरित न जाणे कोय, खसम मार के सत्ती होय ।

32 -तीज त्युंहारां बावड़ी, ले डूबी गणगौर ।

33 -तीजां पाछै तीजड़ी, होळी पाछै ढूंढ, फेरां पाछै चुनड़ी, मार खसम कै मूंड ।

34 -तीतर कै मूंडै कुसळ है ।

35 -तीतर पंखी बादळी, विधवा काजळ रेख । बा बरसे बा घर करै, ई में मीन न मेख ।।

36 -तीन तेरा घर बिखरै ।

37 - तीन बुलाया तेरा आया, भई राम की बाणी । राघो चेतन यूँ कहै, द्यो दाळ में पाणी ।।

38 -तीन सुहाळी, तेरा थाळी । बांटण वाळी सतर जणी ।।

39 -तीसरे सूखो आठवैं अकाळ - राजस्थान के लिए प्रयोग किया गया है ।

40 -तुरकणी कै रान्ध्योड़ा में के कसर ।

41 -तुरकणी रे कात्योडे में ही फिदकड़ो ।

42 -दियो लियो आडो आवै ।

43 -दूसरे की थाळी मँ घी ज्यादा दीखॅ।

44 -दूसरे की थाळी में सदा हि ज्यादा लाडू दीखैं ।

45 -धणी रो धन नीं देखणों, धणी रो मन देखणों ।

46 -धन्‍ना जाट का हरिसों हेत, बिना बीज के निपजँ खेत।

47 -नानी फंड करै, दोहितो दंड भरै ।

48 -नेपॅ की रुख खेड़ा'ई बतादें ।

49 -पावणां सूं पीढ़ी कोनी चालै, जवायाँ सूं खेती कोनी चालै ।

50 -पेड़ की जड धरती और लूगाई की जड़ रसोई ।

51 -पूत का पग पालणें में ही दीख जा हीं ।

52 -पत्थर का बाट - जत्ता भी तोलो, घाट-ही-घाट ।

53 -पीसो हाथ को, भाई साथ को ही काम आवै ।

54 -फूटेड़ो ढोल अर कूटेड़ो ढोली चीं नीं करै ।

55 -बड़ी रातां का बड़ा ही तड़का ।

56 -बहुआं हाथ चोर मरावै, चोर बहू का भाई ।

57 -बाड़ में मूत्यां कसौ बैर नीकळै ।

58 -बाड़ में हाथ घालण सैं तो काँटा ही लाग ।

59 -बातां रीझै बाणियूं, गीतां सै रजपूत । बामण रीझै लाडुवां, बाकळ रीझै भूत ।।

60 -बात में हुंकारो, फौज में नंगारो ।

61 -बाप ना मारी मांखी, बेटो तीरंदाज ।

62 -बाबो सगळां'नॅ लड़ॅ, बाबॅ'न कुण लड़ॅ ।

63 -बामण नै दियां पीछै गाय पराई हो जावै, परबारे हाथां में गयां पीछै रकम पराई हो जावै, पर्णीज्यां पीछै बेटी पराई हो जावै ।

64 -बायेड़ो उगै अर लिखेड़ो चूगै ।

65 -बावाड़ेड़ो पाहुणों भूत बिरौबर ।

66 -बिना बुलाया पावणा, घी घालूं कॅ तेल ।

67 -बिना रोऍ तो मा'ई बोबो कोनी दे ।

68 -बीन कॅ'ई लाळ पड़ँ जणा बराती के करँ ।

69 -बींद मरौ बींदणी मरौ, बांमण रै टक्कौ त्यार। ठाकर ग्या ठग रिया, रिया मुळक रा चोर॥

70 -बैठणो छाया मैं हुओ भलां कैर ही, रहणो भायां मैं हुओ भलां बैर ही ।

71 -भोजन में लाडू अर सगाँ में साडू ।

72 -भौंकँ जका काटँ कोनी ।

73 -मन का लाडु खाटा क्यों ।

74 -मन सूं रान्धेड़ो खाटो ई खीर लागै ।

75 -म्हानैं घडगी अ'र बेमाता बाड़ मैं बड़गी ।

76 -मँगो रोवे ऐक बार, सस्तो रोवे सो बार ।

77 -मन मीठो तो सै मीठा, मन खाटो तो सै खाटा ।

78 -मरद की कूब्बत राड़ में, लुगाई की कूब्बत रान्धणें में !

79 -मानो तो देव नहीं तो भींत को लेव।

80 -मिनख कमावै च्यार पहर, ब्याज कमावै आठ पहर ।

81 -मिनख बाण रो गोलौ ।

82 -मेवा तो बरसँता भला, होणी होवॅ सो होय ।

83 -मेह की रुख तो भदवड़ा'ई बता दें ।

84 -मुंडै सूं नीसरी बात, कमाण सूं नीसरयो तीर, अर परमात्मा री पोळ गयोड़ा पराण पाछा नीं बावडै । 85 -मोटो ब्याज मूल नै खावै ।

86 -रजपूत की जात जमी ।

87 -राजपूती धोरां में रळगी, ऊपर चढ़ गई रेत ।

88 -राजा री आस करणी, पण आसंगो नीं कारणों ।

89 -रांड आग गाळ कोनी ।

90 -रांड कै मारयोड़ै की अर गाँव में फिरयोड़ै की दाद-फिराद कोनी ।

91 -राई का भाव रात ही गया ।

92 -राई बिना किसो रायतो ।

93 -राजा करै सो न्याव, पासो पड़ै सो डाव ।

94 -राजा जोगी अगन जळ, इण की उलटी रीत । डरता रहियो परसराम, ये थोडी पाळै प्रीत ।।

95 -राड़ को घर हांसी, रोग को घर खांसी ।

96 -राड़ सैं बड़ भली ।

97 -रात आगै उँवार कोनी ।

98 -रात च्यानणी, बात आंख्या देखी मानणी ।

99 -राबड़ी को नांव गुलसफ्फा ।

100 -राबड़ी बी कहै मन दांतां सै खावो ।

101 -राबड़ी में गुण होता तो ब्या में नां रान्धता ।

102 -राबड़ी में राख रांधै, चून पाटै पीसती । देखो रै या फ़ूड रांड, चालै पल्ला घींसती ।।

103 -रिण अर बैर कदैई जूनां नीं व्है ।

104 -रांड स्याणी हुवै पण कसम मरयां फेर ।

105 -रूप की रोवै करम की खावै ।

106रूपयो होवै रोकड़ी सोरो, आवै सांस, संपत होय तो घर भलो, नहीं भलो परदेस।

107 -रोता जां बै मरेडां की खबर ल्यावैं ।

108 -लालबही छप्पन रो पानो, बोहरो रोवै छानो-छानो ।

109 -सरलायो छूंदरो, बद्दां बंध्यो जाट । मदमाती गूजरी, तीनों वारां बाट ।।

110 -साबत रैसी सर तो घणाई बससीं घर।

111 -सात घर तो डाकण भी छोड दिया करै है।

112 -सावण भलो सूर'यो भादुड़ो पिरवाय, आसोजां मैं पछवा चाली गाडा भर भर ल्याव ।

113 -सासरौ सुख आसरौ, जे ढबै दिन चार । जे बसै दिन दस बीस, हाथ में खुरपी माथै भार ।।

114 -सासरौ सुख बासरौ, चार दिनां को आसरौ, जै रवे मास दो मास, देस्याँ खुरपी खुदास्याँ घास ।

115 -हाँसी-हाँसी में हो-ज्यासी खाँसी ।

116 -हिल्योडो चोर गुलगुला खाय !

117 -सौ बुद्धि री सांकली,दस बुद्धि री दडी,आच्छी म्हारी एक बुद्धि पाधरे मारग पड़ी!

118 -उठ बीन फेरा ले हे राम मौत दे!

119 -सेफां बाई राम-राम !

120 -गीतेड्या रो छेडो आयो जणे सेफां बाई ने तेडो आयो!

1 comment:

दिनेशराय द्विवेदी said...

थां को घणो घणो उपकार, ज्ये ये क्हावताँ म्हाँके ताईँ पढ़बा नें मली। याँ को हिन्दी में अरथ भी कर देता तो और भी उपकार होतो।