Saturday, April 19, 2008

कैसे कैसे उत्पाद

एक जगह बहुत भीड़ लगी थी
एक आदमी चिल्ला रहा था
कुछ बेचा जा रहा था
आवाज कुछ इस तरह आई
शरीर में स्फुर्ति न होने से परेशान हो भाई
थकान से टूटता है बदन
काम करने में नहीं लगता है मन
खुद से ही झुंझलाए हो
या किसी से लड़कर आए हो
तो हमारे पास है ये दवा
सभी परेशानियां कर देती है हवा
मैंने भीड़ को हटाया
सही जगह पर आया
मैंने कहा इतनी कीमती चीज
कहीं मंहगी तो नहीं है
वो बोला आपने भी ये क्या बात कही है
इतने सारे गुण सिर्फ दो रुपए में लीजिए
भाई साब पहलवान छाप बीड़ी पीजिए
बात इतनी सी थी श्रीमान
प्रचार पहलवान छाप बीडी
मगर हमारे मुंह से निकला बीडी छाप पहलवान
हम तो गलती से ग़लत शब्दों के भाव खा गाये
मगर हमारे मोहल्ले के पहलवान सुनते ही ताव मैं आ गये
एक जोरदार झापड़ हमारे गाल पर जड़ दिया
हम गांधीजी के चेले ठहरे...दूसरा गाल भी आगे कर दिया
मगर उसका अहिंसा मैं विश्वास नही था उसने दूसरे पर भी धर दिया
और बोला...क्यों बै दो चार और खायेगा
बता बेटे तीसरा गाल कहाँ से लाएगा
हमने कहा गांधीजी की जीवनी यहीं तक पढी है
अब ऐसी स्तिथी मैं क्या करना चाहिए
मैं आगे पढ़ कर आता हूँ आप यहीं रुक जाइए
पन्द्रह मिनट बाद हम बाहर आए तो अलग रोल था
बांये हाथ मैं मूंछ और दांये हाथ मैं पिस्तौल था
देखते ही घबराकर पहलवान बोला.....भ..भ..भ.....भाई साब
गांधी जी के पक्के चेले थे आप....
हमने कहा था मगर पन्द्रह मिनट पहले तक था
बस आपसे ही सबक लिया है हमने पाला बदल लिया है
अब गांधीजी को छोड़ चन्द्रशेखर की पार्टी को चुन लिया है
पहलवान तो ऐसा भागा.....के......पीछे मुडके ही नही झाँका..

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