Saturday, April 19, 2008

नगद........नारायण,

अगर सुबह -सुबह राजा कर्ण री टेम नारायण -नारायण नहीं रट परा जे नगद नारायण - नगद नारायण रटो तो जरुर आपने सफलता मिलेला...........
भज नगद नारायण - नगद नारायण भाई रे नगद नारायण - भाई रे नगद नारायण..........
मरज्यावे बिन गोली लाग्या भणकार पड़न्ता काना मैं
रग रग मैं रगत उफाण करे गर्मी आवे ज्यूं इंजण मैं
मानो रे साची सम्झावण बाकी से थोथी रामायण.......भज नगद नारायण
बिन थारे उदघाटण मैं गरमी नहीं आवे भाषण मैं
थारे बिन रोंला शासण मैं फाका पड़ज्यावे राषण मैं
मिट ज्यावे सगळी कलडावण जद सपने मैं लागे अल्डावण.........भज नगद नारायण
है नगद नारायण अंटी मैं नॉ खून माफ़ गारंटी मैं
ज्या निकल साबतो घट्टी मैं दागो नहीं लगे भट्टी मैं
अवतारी ओ कलजुग तारण कर साँझ सवेरे गुण गायण..........भज नगद नारायण

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