चलना सिखाया अंगुली पकड कर पिता की तरह,
कर गये हिसाब हमसे सूद-खोर की तरह!
हिफाजत की बनके फानूस जिस शमां की,
दे दी सुपारी मेरे कत्ल की,खूंखोर की तरह!
जिन्हें तालीम दी दिन-ओ-दुनिया की मौलवी की तरह,
खड़े है उसी के दरबार मैं गुनाहगार की तरह!
इंसान की क्या हस्ती है,वक्त है ताकतवर,
इंसान से ना सही, कुछ भगवान से डरा कर!
ऐ मेरे भगवान!बस कर,और बुरा वक्त ना दिखा,
वरना हम भी बेच आयेगे ईमान नेताओं की तरह!
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