Saturday, December 22, 2012

साली दो

तुम शील कहो अश्लील कहो चाहे तो खुल कर गाली दो

तुम भले ना मुझको कवि मानो मत वाह-वाह की ताली दो !

पर मै तो अपने भाग्य से हर बार यही मागुंगा

तुम गौरी दो या काली दो भगवान मुझे एक साली दो !!



सीधी दो साधारण दो इतराती दो नखरे वाली दो

चाहे बाबुल की टहनी दो चाहे चम्पे की डाली दो !

पर मुझे जन्म देनेवाले ये मांग नही ठुकरा देना

असली दो चाहे जाली दो भगवान मुझे एक साली दो !!



क्योंकि वो यौवन भी क्या यौवन है जिसमे मुंह पर लाली न हुई

पलके घुंघर वाली न हुई आँखे रस की प्याली न हुई !

वो जीवन भी क्या जीवन है जिसमे मनुष्य जीजा न बना

और वो जीजा भी क्या जीजा है जिसके कोई साली न हुई !!



अरे खालो तुम प्लेटों मै लेकिन थाली की और बात

तुम रहो भले फेंकते दाव मगर खाली की और बात !

तुम मटके पर मटके पिलो लेकिन प्याली की और बात

पत्नी को रखो हरदम साथ लेकिन साली की और बात !!



पत्नी केवल अर्धांगन होती है साली सर्वांगन होती है

पत्नी तो रोती ही रहती है साली तो बखैलती रहती है !

साला भी गहरे मै जाकर अक्सर पतवार फैंक देता है

लेकिन साली जीजा की नैया को नही डुबोती है !!



विरहन पत्नी को साली ही पिया का संदेश सुनती है

अरे भोंदू पत्नी को साली ही शिकार करना सिखाती है !

दम्पति मै अगर तनाव रूस अमेरिका जैसा हो जावे

तो साली ही नहरू बनकर भटको को राह दिखाती है !!



साली है रस की प्याली सी साली क्या है रसगुल्ला है

साली है मस्त मलाई सी अथवा रबडी का कुल्ला है !

अरे पत्नी तो हर दम सिकुडी ही रहती है

साली है फाँक संतरे की जो कुछ है खुलम खुल्ला है !!



साली है चटनी पौदीने की बातो की चाह जगाती है

साली है दिल्ली का लड्डू देखो तो भूख बढाती है !

साली है मथुरा की खुरचन रस मै डूबी ही रहती है

और साली है आलू का पापड़ छूते ही शौर मचाती है !!



मुझको भी देखो यारों साली बिन जीवन सुना सा लगता है

सालो का जीजाजी कहना मुझको गाली सा लगता है !!

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