Tuesday, September 22, 2009

अगर हम अपने दिल को अपना इक चाकर बना लेते!
तो अपनी ज़िदंगी को और भी बेहतर बना लेते !!

हमारा दिल जो नाज़ुक फूल था सबने मसल डाला !
ज़माना कह रहा है दिल को हम पत्थर बना लेते !!

हम इतनी करके मेहनत शहर में फुटपाथ पर सोये !
ये मेहनत गाँव में करते तो अपना घर बना लेते !!

कुछ लोग हैं जो अपने धड़ पर सर नहीं रखते !
अगर झुकना नहीं होता तो वो भी सर बना लेते !!

3 comments:

रंजना said...

हम इतनी करके मेहनत शहर में फुटपाथ पर सोये !
ये मेहनत गाँव में करते तो अपना घर बना लेते !!

कुछ लोग हैं जो अपने धड़ पर सर नहीं रखते !
अगर झुकना नहीं होता तो वो भी सर बना लेते !!

वाह वाह वाह........क्या बात कही आपने....
लाजवाब ग़ज़ल.....

Udan Tashtari said...

हम इतनी करके मेहनत शहर में फुटपाथ पर सोये !
ये मेहनत गाँव में करते तो अपना घर बना लेते !!


-जबरदस्त!! क्या बात है!

Unknown said...

वाह उज्जवल सा