अगर हम अपने दिल को अपना इक चाकर बना लेते!
तो अपनी ज़िदंगी को और भी बेहतर बना लेते !!
हमारा दिल जो नाज़ुक फूल था सबने मसल डाला !
ज़माना कह रहा है दिल को हम पत्थर बना लेते !!
हम इतनी करके मेहनत शहर में फुटपाथ पर सोये !
ये मेहनत गाँव में करते तो अपना घर बना लेते !!
कुछ लोग हैं जो अपने धड़ पर सर नहीं रखते !
अगर झुकना नहीं होता तो वो भी सर बना लेते !!
3 comments:
हम इतनी करके मेहनत शहर में फुटपाथ पर सोये !
ये मेहनत गाँव में करते तो अपना घर बना लेते !!
कुछ लोग हैं जो अपने धड़ पर सर नहीं रखते !
अगर झुकना नहीं होता तो वो भी सर बना लेते !!
वाह वाह वाह........क्या बात कही आपने....
लाजवाब ग़ज़ल.....
हम इतनी करके मेहनत शहर में फुटपाथ पर सोये !
ये मेहनत गाँव में करते तो अपना घर बना लेते !!
-जबरदस्त!! क्या बात है!
वाह उज्जवल सा
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