Sunday, April 27, 2008

रिश्ते

रिश्ते भी बेहद अजीब होते है,
कुछ बहुत अजीज तो कुछ काफ़ी करीब होते है!
कुछ हम बनाते है अपनी मर्जी से,
कुछ खुदगर्जी से "आनंद"कुछ किस्मत से नसीब होते है!!

2 comments:

Unknown said...

नमस्कार,

जब भी मैं "मांगीलाल और मैने" इस कविता की गुगल मे खोज करती हूँ तो मुझे आपके ब्लाग का पता मिल जाता है किन्तु जब मैं यहाँ आती हूँ तो वो कविता न पाकर मुझे मायुसी होती है । कृपया वो कविता पुन: प्रकाशित करें ।

भवदीया,
मृदुला.

Unknown said...

नमस्कार आनंद जी,
कृपया आप "मांगीलाल और मैंने" यह कविता पुनः प्रकाशित करे ऐसा निवेदन है। ॐ
साभार: लक्ष्मण राजपुरोहित