जीवन मैं फल पाने की लिए,श्रम तो करना पड़ता है
ईश्वर सिर्फ लकीरे देता,रंग स्वंय ही भरना पड़ता है!
जो बीच राह मैं बैठ गए,वे बैठे ही रह जाते है
जो लगातार चलते रहते है,वे निश्चय ही मंजिल पाते है!
कर्म तेरे अच्छे है बन्दे, तो भाग्य तेरा दास है
धरा की तो बात ही क्या,कदमो मैं आकाश है!
मेरा मानना है की "जिस कार्य को नौकर, भाई, पुत्र अथवा,पति,पत्नी भी नही कर सकते,उसी कार्य को मित्र निश्चित रूप से कर दिखायेगे!
इसलिए मित्रों का स्थान ऊँचा है!"……..” आनंद सिंह,”
Sunday, April 27, 2008
रिश्ते
रिश्ते भी बेहद अजीब होते है, कुछ बहुत अजीज तो कुछ काफ़ी करीब होते है! कुछ हम बनाते है अपनी मर्जी से, कुछ खुदगर्जी से "आनंद"कुछ किस्मत से नसीब होते है!!
जब भी मैं "मांगीलाल और मैने" इस कविता की गुगल मे खोज करती हूँ तो मुझे आपके ब्लाग का पता मिल जाता है किन्तु जब मैं यहाँ आती हूँ तो वो कविता न पाकर मुझे मायुसी होती है । कृपया वो कविता पुन: प्रकाशित करें ।
2 comments:
नमस्कार,
जब भी मैं "मांगीलाल और मैने" इस कविता की गुगल मे खोज करती हूँ तो मुझे आपके ब्लाग का पता मिल जाता है किन्तु जब मैं यहाँ आती हूँ तो वो कविता न पाकर मुझे मायुसी होती है । कृपया वो कविता पुन: प्रकाशित करें ।
भवदीया,
मृदुला.
नमस्कार आनंद जी,
कृपया आप "मांगीलाल और मैंने" यह कविता पुनः प्रकाशित करे ऐसा निवेदन है। ॐ
साभार: लक्ष्मण राजपुरोहित
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